गलवान में 15 जून को भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक टकराव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाकर गलवान झड़प के बारे में जानकारी दी थी और आश्वस्त किया था कि भारतीय सेना सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। किसी को एक इंच जमीन पर भी कब्जा करने नहीं दिया जायेगा।
गलवान झड़प में देश के 20 जांबाज कर्तव्य का निर्वहन करते हुए शहीद हुए थे लेकिन गलवान के शहीदों ने जो पराक्रम दिखाया वह चीन पर इतना भारी पड़ा कि आज तक उसकी यह बताने की हिम्मत भी नहीं हुई कि उसके कितने जवान घुसपैठ के दौरान मारे गये। बहरहाल प्रधानमंत्री ने 20 जून की सर्वदलीय बैठक में जो कुछ कहा उसको लेकर बहुत विवाद हुआ और लगातार संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति होती रही।
राजनीतिक चिकचिक में तमाम बातें ऐसी भी हुई जो सेना का मनोबल तोड़ने वाली थीं। बहरहाल गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के बीच पांच-छह दौर की बातचीत हुई, लेकिन मामला सुलझने के बजाय हर दिन उलझता गया। 15 जून के बाद चीन ने 29-30 अगस्त को एक बार फिर से भारतीय भूभाग पर कब्जा करने का प्रयास किया जिसका हमारे जवानों ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए न सिर्फ चीन की सेना को खदेड़ दिया बल्कि पैंगोंग लेक के दक्षिणी हिस्से के तमाम सामरिक महत्व की चोटियों पर कब्जा कर लिया और तिरंगा फहरा दिया।
इस तरह जैसे गलवान झड़प के बाद चीन पैंगोंग लेक के फिंगर प्वाइंट 4 से 8 तक के बीच आकर बैठ गया, ठीक उसी तरह 29-30 अगस्त की रात्रि में जब चीन ने दोबारा हरकत की तो भारतीय सेना ने चीन से कहीं अधिक क्षेत्र एवं महत्वपूर्ण सामरिक ठिकानों पर कब्जा कर लिया। तभी से चीन बौखलाया हुआ है। चीन का सरकारी मीडिया हर दिन समाचार, लेख एवं वीडियो के जरिये भारत को धमकी दे रहा है और लद्दाख से अरुणाचल तक एलएसी पर चीन सैनिकों का जमावड़ा कर रहा है।
एक तरह से चीन सीमा पर युद्ध की तैयारी कर रहा है और चीन का सरकारी मीडिया धमकियां दे रहा है। ऐसे में कब युद्ध छिड़ जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। हालात इतने खराब हैं कि दोनों देशों की सेना एक दूसरे के फायरिंग रेंज हैं और कभी भी झड़प हो सकती है। ऐसे में यह जरूरी है कि सरकार सीमा पर वास्तविक स्थिति की जानकारी देने के साथ सुरक्षा के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी दे और सभी दलों से समर्थन हासिल करने का प्रयास करे।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पहले लोकसभा में और फिर राज्य सभा में लद्दाख में हुए टकराव की विस्तृत जानकारी देने के साथ भारत यह दृढ़ता भी प्रकट कर दी है कि अगर किसी ने उकसाने का प्रयास किया तो मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। अब प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर चीन के मुद्दे पर जो राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया है वह एक उचित कदम है। अब इस मुद्दे पर दलगत राजनीति के बजाय पूरे देश को एक सुर में बोलना चाहिए ताकि दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में तैनात हमारे जवानों के हौसले और बुलंद हों।





