प्रदेश में अनलॉक के ठीक एक माह दस दिन बाद छोटी अवधि के नियमित लॉकडाउन का फैसला अगर सरकार को लेना पड़ा है तो इसके लिए दरअसल प्रदेशवासी ही जिम्मेदार हैं। एक जून से जब अनलॉक की शुरुआत हुई थी तब स्थिति नियंत्रण में थी और कोरोना के इलाज के लिए बनाये गये अधिकांश बेड खाली थे, लेकिन अनलॉक होते ही जिस तरह प्रदेशवासियों ने गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया, सुरक्षा उपायों के बिना जमावड़ा शुरू कर दिया उससे फिर लॉकडाउन की नौबत आ गयी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जान भी, जहान भी के फार्मूले पर आगे बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए सप्ताह में दो दिन का नियमित लॉकडाउन लगाने का फैसला किया। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के जो आंकड़े हैं वे अब डराने लगे हैं। 35 हजार से अधिक संक्रमण के मामले, 10 हजार से अधिक सक्रिय केस, हर दिन हजार-डेढ़ हजार के बीच निकलते नये मामले और एक हजार से अधिक मृतक संख्या, यह ऐसे आंकड़े हैं जो स्पष्ट करते हैं कि अगर संक्रमण रोकने के लिए ठोस पहल नहीं की गयी तो कभी भी स्थिति विस्फोटक हो सकती है।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला केस मार्च के प्रथम सप्ताह में आगरा में पाया गया था। मार्च से जून माह तक काफी हद तक स्थिति नियंत्रण में रही। इस दौरान प्रदेश सरकार ने बड़े पैमाने पर कोविड केयर सेंटर के रूप में डेडीकेटेड इलाज सुविधाओं को विकसित किया। आइसोलेशन बेड एवं कोरेन्टाइन सेंटर बनाये, जांच की सुविधा बहुत कम थी जिसे अब 50 हजार तक विस्तारित किया गया है।
इस तरह प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, हर जिले में आइसोलेशन बेड, वेंटीलेकर की उपलब्धता होने और कोरोना को लेकर डाक्टरों की समझ बढ़ने से इलाज बेहतर हुआ है और मृत्यु दर में इतनी कमी आ गयी है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन तेजी से मामले बढ़ते तो ठीक से इलाज करना मुश्किल हो जायेगा।
इसलिए यह जरूरी है कि प्रदेश सरकार जहां हर दिन टेस्टिंग, ट्रैसिंग और ट्रीटमेंट की सुविधाओं को विकसित करे वहीं जरूरी पाबंदियों को लगाकर कोरोना की रफ्तार को भी सीमित करने का प्रयास करे ताकि जो लोग संक्रमित हों उनका बेहतर इलाज हो और स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट सकें।
इसके लिए सप्ताह में दो दिन नियमित लॉकडाउन लागू किये जाने का फैसला एकदम सही है। कोरोना केस बड़े शहरों में ही केन्द्रित हो गये हैं। शहरों में शनिवार एवं रविवार को छुट्टी होने के कारण बाजार में भीड़ उमड़ती है। इससे सोशल डिस्टेसिंग नहीं हो पाती। शनिवार एवं रविवार को लॉकडाउन लागू होने से सड़कों पर वाहन बहुत कम होंगे, बाजार बंद रहेंगे तो लोग घरों से नहीं निकलेंगे।
लॉकडाउन के दौरान सेनेटाइजेशन होगा। इससे संक्रमण की चेन तो नहीं टूटेगी लेकिन रफ्तार जरूर सीमित होगी और यह बहुत जरूरी है। शनिवार, रविवार के लॉकडाउन के साथ टेस्टिंग को 50 हजार तक करने और आॅक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने व 48 घंटे का बैकअप रखने का फैसला भी सराहनीय है।





