एसएनए में रंजना मिश्रा की कजरी गायन ने समां बांधा
लखनऊ। भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् एवं उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षितिज श्रृंखला के अंतर्गत शुक्रवार को रंजना मिश्रा द्वारा कजरी गायन की प्रस्तुति वाल्मीकि रंगशाला, उ. प्र. संगीत नाटक अकादमी, विपिनखंड, गोमतीनगर में किया गया। कार्यक्रम का आगाज दुर्गा कब देबू दरसनवा…से हुआ, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गये। इस खूबसूरत प्रस्तुति के उपरांत झुलेली राधा झुलावे कन्हइया…, उमड़ती आवे हो ननदी…, सावन भदोहिया बरसेला पनिया…,बरसन लागी बदरिया… कजरी सुनाकर दर्शक दीर्घा में मौजूद दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के अगले पड़ाव में रंजना मिश्रा ने गोरिया कहे बलम हमरा के…, कैसे खेलन जइबू सावन में कजरिया…, मोरे चरखा कै टूटे न तार…लोकगीत के जरिए श्रोतओं का दिल जीता। कार्यक्रम में संगत देने वालों में कोरस भावना शुक्ला एवं सुश्री सुरुचि उपाध्याय, वादक कलाकारों में सिंथेसाइजर पर आकाश तिवारी, तबला पर सत्यम शिवम सुन्दरम सिंह, ढोलक पर प्रदीप कुमार, औक्टोपेड पर सूरज ने खूबसूरत संगत दी। रंजना मिश्रा ने संगीत के क्षेत्र में अपने आप को एक संगीत साधिका के रूप में स्थापित कर निरंतर संघर्षरत है। रंजना मिश्रा अवधी लोक गीतों के माध्यम से प्रदेश व देश के विभिन्न मंचो पर अपनी कला का प्रदर्शन कर के अभूतपूर्व उपलब्धि प्राप्त की है।





