-2.40 कुंतल मोम से तैयार की जा रही 22 फुट ऊंची जरीह
-बड़े इमामबाड़े से पहली मोहर्रम की शाम छोटे इमामबाड़े तक निकलेगा जुलूस
लखनऊ। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में पहली मोहर्रम को शाही जरीह का जुलूस निकलेगा। मोम व अभ्रक से बनने वाली जरीह बनाने का काम तेज है। छोटे इमामबाड़े में तैयार की जा रही जरीह में आकर्षक डिजाइन बनाये जा रहे हैं। पहली मोहर्रम पर 7 या 8 जुलाई को एतिहासिक शाही जरीह का जुलूस शाम पांच बजे बड़े इमामबाड़े से निकलेगा। यह छोटे इमामबाड़े तक जायेगा। जुलूस में मोम की जरीह मुख्य आकर्षण का केन्द्र होगी। कारीगर वसीम अली ने बताया कि लगभग 2.65 लाख रुपये की लागत से मोम व अभ्रक की जरीह बन रही हैं। डबल छतरी की जरीह 22 फुट ऊंची और दस फुट चौड़ी है। इसे बनाने में करीब दो 2.40 कुंतल मोम का इस्तेमाल किया गया है। जरीह में मोम से बनी करीब 20 तरह डिजाइन देखने को मिलेगी। जिसमें चांद, तारा, फूल, मछली, स्टार, पत्ती और अन्य डिजाइन शामिल हैं। इसमें बीस छोटे, चार बड़े गुम्बद और दो छतरी बन रही हैं। लाल, सफेद व हरे रंग के मोम से आठ मीनार भी बनायें जा रहे हैं। जरीह के ऊपर से प्लास्टिक के तरह-तरह के फूलों से बना सेहरा भी लगेगा। शाही जुलूस में 17 फुट ऊंची और आठ फुट चौड़ी अभ्रक की जरीह भी शामिल होगी। जरीह को कागज से बने रंग-बिरंगे फूलों और सफेद चमकीली झालर से सजाया जा रहा है। इन दो जरीहों के अतिरिक्त शाही मेंहदी के जुलूस के लिए दो मेंहदी, 24 फुलवारी और 12 अराइश शामिल हैं। इमामबाड़ा शाहनजफ के लिए 17 फुट ऊंची, 8 फुट चौड़ी एक लाल व एक रही जरीह बनी है। जरीह को बहराइच के जरवल निवासी कारीगर वसीम अली, फिरोज, मीकाइल, पप्पी, आमिर, सामिर, साबिर, प्रधान और सकीना बना रहे हैं।





