देश में वैक्सीन पर अपने-अपने तौर-तरीकों से जारी सियासत के बीच दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना प्रतिरक्षण अभियान शुरू हुआ और पहले ही दिन दो लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना का टीका लगाया गया। वैक्सीन को लेकर फैलायी गयी तमाम अफवाहों के बीच जिस तरह से स्वास्थकर्मियों ने बढ़ चढ़कर टीकाकरण कार्यक्रम में हिस्सा उससे न सिर्फ देश का भरोसा बढ़ा बल्कि यह तय हो गया कि अब आगे भी टीकाकरण कार्यक्रम में स्वास्थ्य संबंधी कोई बड़ी चुनौती नहीं आने वाली है।
दो लाख से अधिक लोगों को एक दिन में वैक्सीन दी गयी जिसमें से तीन-चार सौ लोगों में बहुत ही मामूली साइडइफेक्ट के मामले सामने आये। अधिकांश को सिरदर्द, चक्कर, पसीना आने और सीने में भारीपन की मामूली दिक्कत सामने आयी। गौरतलब है कि हर वैक्सीन में मामूली साइड इफेक्ट होते हैं लेकिन अंतत: वैक्सीन का उद्देश्य व्यापक स्वास्थ्य रक्षा होती है।
इसलिए इस तरह के मामूली साइडइफेक्ट बहुत मायने नहीं रखते हैं। वैक्सीनेशन के पहले ही दिन एम्स के निदेशक डा. संदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं डाक्टर महेश शर्मा, सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला जैसे प्रतिष्ठित लोगों ने वैक्सीन लेकर न सिर्फ देशवासियों का भरोसा बढ़ाया बल्कि इसको लेकर फैलायी गयी तमाम अफवाहों को भी एक तरह से खारिज कर दिया। कोरोना की वैक्सीन को लेकर सबसे अधिक राजनीति उत्तर प्रदेश में हुई है। यहां वैक्सीन न लेने की बात भी कही गयी, वैक्सीन से बांझ हो जाने, गरीबों को नुकसान होने जैसी तमाम बातें भी कहीं गयी जिनका तथ्यों एवं तर्कों से कोई लेना देना नहीं था।
दरअसल अगर वैक्सीन पर होने वाली राजनीति को देखें तो सब कुछ चुनाव के टाइम टेबल के हिसाब से हुआ। बिहार चुनाव वैक्सीन आने के पहले ही पड़ गया था इसलिए वहां अक्टूबर-नवम्बर में ही वैक्सीन पर जमकर राजनीति हुई, पश्चिम बंगाल में अगले तीन-चार महीनों में चुनाव हैं इसलिए वहां भी वैक्सीन पर जमकर राजनीति हो रही है।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरूआत में चुनाव है, इसलिए तमाम पार्टियां सत्ता में आने पर फ्री वैक्सीन का वायदा कर रही हैं। बहरहाल हमारे यहां राजनीति का चरित्र ही ऐसा है कि कोई भी मौका पाने पर चौका मारने से नहीं चूकता, लेकिन जमीन पर कोरोना से लड़ाई, कोरोना काल में लोगों की मदद करने से लेकर वैक्सीनेशन कार्यक्रम की तैयारियां तक बहुत ही सुविचारित रणनीति के तहत की गयीं और यही कारण है कि उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहां पहले ही दिन सबसे अधिक लोगों को कोरोना का टीका लगाया गया।
यह प्रदेश सरकार द्वारा टीकाकरण के लिए किये गये व्यापक तैयारियां के कारण ही संभव हो पाया। जिस तरह से देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया गया और पहले ही दिन दो लाख से अधिक लोगों को टीका देने का रिकार्ड बना उससे स्पष्ट है भारत में बनी दोनों वैक्सीन कोवीशील्ड और कोवैक्सीन बहुत ही सुरक्षित हैं। ऐसे में उम्मीद यही है कि आगामी दिनों में टीकाकरण अभियान बिना बाधा के सुचारू रूप से चलेगा।





