बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित कथक संध्या का आयोजन
लखनऊ। बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित कथक संध्या का आयोजन राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में कार्यक्रम का शुभारम्भ उपाध्यक्ष महोदया, डॉ. मिथिलेश तिवारी एवं विशेष सचिव, संस्कृति/निदेशक, संजय कुमार सिंह द्वारा मुख्य अतिथि प्रो. मनुका खन्ना, कुलपति महोदया, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ व विशिष्ट अतिथि डॉ. आरएन मिश्रा, कुलपति महोदय, मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय, फरूर्खाबाद का पुष्पगुच्छ-अंगवस्त्र द्वारा स्वागत, आभार एवं दीपप्रज्जवलन द्वारा किया गया।
कथक संध्या के अन्तर्गत लखनऊ घराने की सुप्रसिद्ध कलाकार सुश्री स्मृति मिश्रा टन्डन व सुश्री कांतिका मिश्रा के द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। आपने अपने पिता एवं लखनऊ घराने के सुप्रसिद्ध गुरू स्व. अर्जुन मिश्रा के सानिध्य में कथक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। आपके द्वारा पैरिस, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, साउथ अफ्रिका एवं कोलम्बो इत्यादि देशों में सराहनीय प्रस्तुतियां दी गयी हैं। आपको संस्कृति मंत्रालय एवं संगीत नाटक अकादमी द्वारा उत्कृष्ट सम्मान प्राप्त है।
प्रस्तुति के सम्बन्ध में- प्रथम प्रस्तुति के अन्तर्गत आपके समक्ष दशा अवतार की प्रस्तुति जिसमें भगवान विष्णु के दस भव्य रूपों को प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात तीन ताल विलंबित मध्यलय में लखनऊ घराने की नजाकत और थाट को प्रदर्शित करते हुए उठान, आमद और धतक थुंगा, परन जुड़ी आमद के साथ-साथ कवित्त एवं खास बंदिशों को तीनलय में चक्कर प्रदर्शित किया गया। इसी के साथ दादरा के छंद में पैरों के काम प्रदर्शित किया गया।
अगले चरण में कजरी प्रस्तुत की गयी। जिसके बोल हैं नहीं आए घनश्याम घेरी आई बदरी… इस प्रस्तुति में राधा के विरह को प्रकट किया गया, जो कृष्ण के आगमन के लिए व्याकुल है। इसी क्रम में सुश्री कांतिका मिश्रा द्वारा अभिनय पक्ष के अन्तर्गत द्रौपदी को प्रकट करते हुए नारी शक्ति के अद्भुत रूप दशार्या गया।
अन्तिम प्रस्तुति के रूप में लय गति के अन्तर्गत लखनऊ घराने की खास बंदिशें और तिहाई परन गत को अंतिम द्रुतलय में प्रस्तार किया गया। इस प्रस्तुति में टुकड़ों और परन के साथ-साथ लय गति को भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के समापन में छमाही अभिरूचि पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गये।





