back to top

संतोष की गंगा

मनुष्य स्थूल कम, सूक्षम अधिक है। वह भावनाओं के सहारे पैदा होता है, भावनाओं में ही जीवित रहता है और भाव जगत में ही विलीन होता है। भावनाओं के प्रति समान ही श्रद्धा है। यह संवेदना जहां भी होगी वहीं संतोष की निर्झरिणी प्रवाहित हो रही है।

भगवान कृष्ण ने कहा है-

सत्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत।
श्रद्धामनोअयं पुरुषों यो यच्छद्ध स एवं सा:।।

अर्थात हे अर्जुन। यह सृष्टि श्रद्धा से विनिर्मित है। जिसकी जैसी श्रद्धा होती है वह पुरुष वैसा ही बन जाता है। अर्थात बुराइयों के प्रति श्रद्धा व्यक्ति को समस्याओं में कैद कर देती है तो आदर्शों के प्रति आस्था मनुष्य जीवन को सुख शांति और प्रसन्नता से भर देती है। अंत:करण की उत्कृष्टता को श्रद्धा के नाम से जाना जाता है। उसका व्यवहारिक स्वरूप है भक्ति। यों साधारण बोलचाल में दोनों का उपयोग पर्यायवाची शब्दों के रूप में होता है। फिर श्रेष्ठता के प्रति असीम प्यार के रूप में उसकी व्याख्या की जा सकती है।

भक्ति उसका व्यवहारिक रूप है। करुणा, उदारता, सेवा आत्मीयता के आधर पर चलने वाली विभिन्न गतिविधियों को भक्ति कहा जा सकता है। देशभक्ति आदर्श भक्ति, ईश्वर भक्ति आदि के रूप में त्याग बलिदान के, तप साधना के, अनुकरणीय आदर्शवादिता के अनेकों उदाहरण इसी भक्ति भावना की प्ररेणा से बन पड़ते हैं। आस्थाएं आकांक्षाएं जब परिपक्व स्थिति में पहुंचती हैं और निश्चयपूर्वक लक्ष्य की आरे बढ़ती हैं तो उन्हें संकल्प कहते हैं।

संकल्प की प्रचण्ड शक्ति सर्वविदित है। संकल्पों के धनी व्यक्तियों ने ही सामान्य साधनों और सामान्य अवसरों में चमत्कारी सफलताएं उपलब्ध की हैं। संकल्प की प्रचुरता मस्तिष्क और शरीर दोनों को अभीष्ट दिशा में घसीट ले जाती है और सअंख्य अवरोधों से टकराती हुई उस लक्ष्य तक पहंचाती है जिसे आरम्भ में असंभव तक समझा जाता था।

पुरुषार्थियों की यश गाथा से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं। वस्तुत: उन्हें संकल्प शक्ति का चमत्कार ही कह सकते हैं। यहां इतना और समझने की आवश्यकता है कि संकल्प उभर कर आने से पूर्व विश्वास बनकर मन:क्षेत्र में अपनी जड़ें जमाता है या उस बीज का प्रत्यक्ष पौधा संकल्प रूप में प्रकट होता है।

विश्वास की प्रतिक्रिया ही संकल्प है। यही कारण है कि अंत:करण की उच्च स्तरीय आस्थाओं को श्रद्धाविश्वास का रूप दिया गया है। वे उत्कृष्ट स्तर के होने पर शिव पार्वती का युग्म बनते हैं और निकृष्ट होने पर आसुरी क्रूर कर्मों में इस प्रकार निरत दिखाई पड़ते हैं जैसा कि उपाख्यानों में दानवों एवं शैतान का चित्रण किया जाता है।

RELATED ARTICLES

जन्माष्टमी पर सजे बाजार, कान्हा की बांसुरी और मूर्ति कर रही आकर्षित

लखनऊ। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व है। कान्हा के जन्म के इस उत्सव को मनाने के लिए हर कोई लालायित है। घरों...

‘श्याम पिया मोरे रंग दे चुनरिया’… पर दिखा कथक का अद्भुत रूप

ख्यातिलब्ध कलाकारों की कथक प्रस्तुतियों ने बनाया नमन समारोह को यादगार नवांकुरों के घुघरुंओं ने दर्शकों का दिल जीता लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ...

रंगों और रचनात्मकता के साथ संपन्न हुआ ‘नवागमन’

लखनऊ। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के वास्तुकला एवं योजना संकाय में आयोजित दो दिवसीय नवागमन ओरिएंटेशन कार्यक्रम का समापन एक रंगमय,...

जन्माष्टमी पर सजे बाजार, कान्हा की बांसुरी और मूर्ति कर रही आकर्षित

लखनऊ। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व है। कान्हा के जन्म के इस उत्सव को मनाने के लिए हर कोई लालायित है। घरों...

‘श्याम पिया मोरे रंग दे चुनरिया’… पर दिखा कथक का अद्भुत रूप

ख्यातिलब्ध कलाकारों की कथक प्रस्तुतियों ने बनाया नमन समारोह को यादगार नवांकुरों के घुघरुंओं ने दर्शकों का दिल जीता लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ...

रंगों और रचनात्मकता के साथ संपन्न हुआ ‘नवागमन’

लखनऊ। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के वास्तुकला एवं योजना संकाय में आयोजित दो दिवसीय नवागमन ओरिएंटेशन कार्यक्रम का समापन एक रंगमय,...

भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, सृजन और संवेदना का प्रतीक रही है

निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम, लखनऊ के संयुक्त तत्त्वावधान...

रॉक बैंड की प्रस्तुति के बीच इस्कॉन मंदिर में होगा कान्हा का स्वागत

लखनऊ। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन) सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ में 4 सितंबर दिन शुक्रवार...

पारस अंतरराष्ट्रीय दृश्यकला प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ

लखनऊ। शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में कला दीर्घा, अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका एवं कला स्रोत कलावीथिका के संयुक्त तत्वावधान में पारस अंतरराष्ट्रीय दृश्यकला प्रदर्शनी...