हालांकि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक पहल नहीं हुई है, लेकिन बड़े-बड़े फैसले लेने के मामले में एक स्थापित पहचान बना चुकी मोदी सरकार से देश बढ़ती जनसंख्या जैसी जटिल समस्या पर कोई निर्णायक पहल की उम्मीद कर रहा है।
संभवत: यही कारण है कि देश के अनेक भागों में लगातार जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई न कोई बहस, सेमिनार या खबरें सुर्खियों में बनी रहती हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित कर रहे थे तब उन्होंने बढ़ती जनसंख्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। तब प्रधानमंत्री की चिंता का पूरे देश में स्वागत भी हुआ था और सहमति के सुर भी मिले थे। हाल के दिनों में कई मौकों पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बढ़ती जनसंख्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं।
भागवत ने सरकार से मांग करते हुए हम दो, हमारे दो की नीति को लागू करने ने का सुझाव भी दिया है। पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुछ बुद्धजीवियों ने याचिका दायर कर अदालत से मांग की कि अदालत सरकार को जनसंख्या पर नीति बनाने का निर्देश दे। हालांकि अदालत ने अपनी सीमाओं को याद दिलाते हुए कहा कि वह सरकार को इस मुद्दे पर निर्देश नहीं दे सकती है, लेकिन जनसंख्या एक बड़ी समस्या है इसे अदालत ने भी माना है। सरकार को निर्देश देने की मांग करने वाली ऐसी ही याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।
देश में जनसंख्या को लेकर लगातार आवाज उठ रही है और अब तो अल्पसंख्यक समाज भी काफी हद तक जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर सहमत है। हां इसको कैसे रोका जाये इसके तरीकों को लेकर जरूर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए बड़ी समस्या है, इसे अल्पसंख्यक समाज के लोग भी स्वीकार कर रहे हैं। सरकार में इस गंभीर मुद्दे पर क्या विमर्श चल रहा है, इसकी किसी को जानकारी नहीं है।
बहरहाल, इतने गंभीर मुद्दे पर सरकार में कोई विचार-विमर्श नहीं चल रहा हो, ऐसा नहीं हो सकता है और वह भी तब जबकि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वयं मांग कर रहे हों। ऐसे में संभव है कि सरकार इस मुद्दे पर कोई मन बना चुकी हो और सही टाइमिंग का इंतजार कर रही हो। दरअसल हाल के दिनों में जिस तरह से सरकार ने तीन तलाक, कश्मीर विभाजन, 370, सीएए, एनपीए को लेकर फैसले किये हैं उससे बहुत से लोग यह महसूस करने लगे हैं कि फिलहाल बड़े-बड़े फैसले लेने की यह रफ्तार बहुत अधिक है।
सरकार को इसमें थोड़ा अंतराल रखना चाहिए ताकि एक मुद्दा पूरी तरह सेटल हो जाये तब दूसरे मसले पर पहल हो। बहरहाल जनसंख्या वृद्धि एक बड़ी समस्या है और देश की वर्तमान आबादी जितनी है उसका ठीक से भरण पोषण हो, अच्छे घर, शहरों में पार्क और पर्याप्त वनाच्छादन हो इतनी जमीन भी नहीं है। ऐसे में देश की आबादी में अगर एक भी व्यक्ति नया जुड़ता है तो उसके साथ हजार समस्याएं भी जुड़ रही हैं। इसलिए इस मुद्दे पर देरी ठीक नहीं है।





