भारत की सम्प्रभुता पर बुरी नजर रखने, सीमा पर साजिश करने और हमारे सैनिकों पर धोखे से हमला करने वाले चीन को वैसे तो कोई भी दण्ड दिया जाये उसके अपराध की तुलना में बहुत कम होगा, लेकिन फिर भी जिस तरह सरकार ने आर-पार के जंग का एलान कर दिया है उससे चीन निश्चित ही भौचक होगा। चीन 1962 की मन:स्थिति में फंसा रहा जबकि आधुनिक भारत उससे आगे निकल चुका है।
आजादी के बाद भारतीय नेतृत्व एवं राजनय ने जिस तरह चीन को खाली मैदान दिया, उसकी हरकतों को नजरअंदाज किया, सीमा पर घुसपैठ और अतिक्रमण करने दिया, उससे चीन मनबढ़ हो गया। इसी मनबढ़ई में वह ऐसी गलती कर बैठा जहां से पूरी दुनिया अब चौकन्नी हो गयी है और अब चीन का पतन तय है। शी जिनपिंग चीनी राष्ट्रवाद को उभार कर जिस वन चाइना पालिसी, चीनी साम्राज्य और रेशम मार्ग का सपना देख रहे थे उसका गर्भपात हो गया है। चीन को अपनी आर्थिक प्रगति पर जरूरत से ज्यादा गुमान था और इसी आर्थिक ताकत के घमंड में वह कुछ इमरानों, महिंदाओं, ओलियों और यामीनों को डालरों से खरीद कर और इनके राष्ट्रों की प्रभुता से खेलकर विश्व विजेता बनने का सपना देखने लगा था।
इसी नशे में चीन 2020 के भारत से भी पंगा लेने का दुस्साहस कर बैठा और यह हरकत अब चीन को इतनी भारी पड़ रही है कि पूरी दुनिया से चीन को भगाया जा रहा है। भारत की सीमाओं का बार-बार अतिक्रमण, साउथ चाइना सी में दबंगई और हिन्द महासागर में बुरी नजर चीन पहले से रखता था, लेकिन दुनिया इन हरकतों को एक साथ जोड़कर नहीं देखती थी। यही कारण है चीन की दबंगई चलती रही। लेकिन दुनिया पर साम्राज्य कायम करने के सनक में चीन ने वुहान की फैक्ट्री में कोरोना बनाकर पूरी दुनिया में छोड़ दिया।
इससे दुनिया निपटने में लगी थी कि इसी बीच वह भारत की जमीनें कब्जाने और जापानी द्वीपों को हड़पने में लग गया। जब दुनिया ने चीनी वाइरस, चीन की हरकतों और चीन के व्यापारिक दुराचरण को जोड़कर देखा तब अहसास हुआ कि चीन बेलगाम हो गया है और विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चीन की यह असलियत उजागर होने के बाद उस पर चौतरफा प्रहार शुरू हो गया है। अमरीका, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां चीन से निकलने लगी हैं, चीनी कंपनियों एवं उत्पादों का बहिष्कार किया जा रहा है।
चीन पर चौतरफा आर्थिक प्रहार की एक कड़ी के रूप में भारत में टिकटॉक, शेयर इट, यूसी बाउजर, बैट्री सेवर, स्वीट सेल्फी सहित 59 मोबाइल एप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी एप भारत से पैसा कमाते थे और भारतीयों का डेटा चीन पहुंचा देते थे। इससे आर्थिक नुकसान के साथ सुरक्षा को भी खतरा था। सरकार ने इसी आधार पर चीनी एप्स को प्रतिबंधित किया है। इससे चीन बौखलाया है और भेदभाव बंद करने, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग की पट्टी पढ़ा है।
लेकिन चीन की इन बातों पर ध्यान देने के बजाय भारत को अपनी आर्थिक और सामरिक ताकत को दिनोंदिन मजबूत करने, चीन से पीड़ित और साझा हित वाले देशों के साथ आर्थिक, सामरिक सहयोग बढ़ाने और चीनी के हितों पर चौतरफा प्रहार जारी रखना चाहिए। दरअसल यही चीन का सही इलाज है। चीन शांति और सदभाव की भाषा नहीं समझता है। इसलिए चीन से उसी भाषा में बात करनी चाहिए जो वह समझता है।





