अप्रत्याशित महामारी से जूझ रही दुनिया की अर्थव्यवस्था भी सुस्त पड़ गयी है। यह आशंका प्रबल हो गयी है कि दुनिया जब भी महामारी से उबरेगी तो उसके तुरंत बाद महामंदी का संकट सामने होगा। अभी महामंदी की उतनी चर्चा इसलिए नहीं है क्योंकि सबकी प्राथमिकता लोगों की जान बचाने की है।
जीवन बचाने के लिए अमरीका, यूरोप से लेकर एशिया तक, सभी छोटे बड़े देश जूझ रहे हैं। कोरोना का विस्तार 194 देशों तक हो गया है। कोरोना दुनिया के सामने एक भयानक संकट है लेकिन दुनिया भर के वैज्ञानिक एवं चिकित्सक जल्द ही प्रभावी इलाज और वैक्सीन ढूंढ लेंगे। इससे बीमारी या तो खत्म हो जायेगी या सामान्य बीमारी बनकर रह जायेगी। कोरोना संकट अभी पूरी दुनिया में अपने भयानक रूप में है और इससे निपटने के लिए ज्यादातर संकटग्रस्त देशों ने लॉकडाउन के चीनी उपाय को ही अपनाया है।
इससे कोरोना से दुनिया अगले कुछ महीनों में उबर जायेगी लेकिन उसके बाद महामंदी का जो जख्म मिलेगा उससे निपटने की तैयारियां भी शुरू हो गयी हैं। कोरोना सबसे पहले चीन में सामने आया और तीन महीने के कड़े संघर्ष के बाद चीन कोरोना से उबर रहा है। चीन ने कोरोना से प्रभावित अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए नकदी प्रवाह बढ़ाने के साथ राजकोषीय एवं मौद्रिक उपायों से एक बंपर डोज दिया है। अमरीका में कोरोना बड़ा खतरा मार्च के प्रथम सप्ताह में ही बना था और खतरे की भनक लगते ही वहां बड़े पैमाने पर टेस्टिंग करके कोरोना संक्रमित अधिकांश लोगों को ढूंढ निकाला गया।
कोरोना से अमरीका में पांच सौ से अधिक लोगों की मौत हो गयी और 50 हजार से अधिक प्रभावित हैं, लेकिन बीमारी से बचाव के सारे उपाय करते हुए भी ट्रंप ने एक बड़ा राहत पैकेज देने का फैसला किया है। दो ट्रिलियन से भी बड़े आकार के राहत पैकेज में ट्रंप ने सभी प्रभावित उद्योगों को मदद करने के साथ 75 हजार डालर से कम कमाने वाले व्यक्तियों को भी नकद राहत देने का फैसला किया है। ट्रंप के बंपर पैकेज की भनक लगते ही अमरीका का प्रमुख शेयर बाजार डाउजोंस 1929 की महामंदी के बाद सबसे बढ़ी बढ़त दर्ज किया।
ट्रंप राजकोषीय एवं मौद्रिक हस्तेक्षप से अमरीकी अर्थव्यवस्था को उबारना चाहते हैं और वहां के कारोबारी जगत में इसकी प्रशंसा भी हो रही है। भारत की अर्थव्यवस्था अमरीका से ज्यादा प्रभावित है क्योंकि चीन के संकट के कारण पहले ही खराब संकेत मिलने लगे थे और होली के बाद से देश के विभिन्न भागों में बंदी शुरू हो गयी है थी। 25 मार्च से तीन सप्ताह के लिए तो कंपलीट लॉकडाउन है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने वाला है।
संकट के दौर में आर्थिक प्रगति पर अभी सोचना ठीक नहीं है लेकिन अर्थव्यवस्था को बचाने और वित्तीय तंत्र को ढ़हने से रोकने के लिए एक बड़े पैकेज की दरकार है। इसके लिए कोविड-19 टास्क फोर्स भी बनाया गया है। अब जरूरत है कि निरंतर चलने वाले छोटे-छोटे प्रयासों के साथ एक समग्र राहत पैकेज का ऐलान हो और प्रभावित उद्योगों, वित्तीय तंत्र की मदद के साथ एक निश्चित आमदनी वाले व्यक्ति को नकद सहायता, के्रडिट लिमिट या ब्याज मुक्त कर्ज के रूप में रूप में राहत दी जाये ताकि अर्थव्यवस्था संभल सके।





