महाराष्ट्र कोरोना महामारी से सर्वाधिक प्रभावित है। एशिया के सबसे बड़े स्लम धारवी में भी कोरोना घुस गया है। राज्य में कई जगह कम्यूनिटी ट्रॉसमिशन के संकेत भी हैं, लेकिन महाराष्ट्र सरकार लॉकडाउन की गंभीरता नहीं समझ रही है। सर्वाधिक संक्रमण एवं मौत के बावजूद जिस तरह दैनिक जरूरत के बाजारों में भीड़ उमड़ती दिखाई देती है, सड़कों पर लोग बिना मास्क लगाये सैर-सपाटे के अंदाज में घूमते हैं इस पर कठोर पाबंदी लगाने की जरूरत है।
राज्य सरकार ऐसा करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप पर उतर आयी है। यह चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में लॉकडाउन 19 दिनों तक बढ़ा दिया है। अब लॉकडाउन 3 मई तक रहेगा और इस दौरान धीरे-धीरे जरूरी सेवाओं और कारोबार को उन जगहों पर खोला भी जायेगा जहां स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मुंबई में जिस तरह लॉकडाउन की अवधि बढ़ाये जाने के बाद अचानक बांद्रा में हजारों प्रवासी मजदूरों की भीड़ जमा हो गयी उसके लिए सीधे-सीधे राज्य सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है।
जो प्रवासी श्रमिक लॉकडाउन के कारण फंसे हैं उनके लिए रहने व खाने की उचित व्यवस्था करना राज्य सरकार का कर्तव्य है। अगर सरकार ने सभी श्रमिकों को अनाज, जरूरी चीजें और नकदी मुहैया कराने का काम किया होता, तो अचानक हजारों प्रवासी मजदूर घर भेजने की मांग करते हुए सड़कों पर नहीं उमड़ते। यह और चिंता का विषय है कि अचानक हजारों प्रवासी श्रमिकों के सड़क पर एकत्रित होने और घर भेजने की मांग की घटना पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने इस घटना के लिए राज्य सरकार की प्रवासी श्रमिकों को राहत देने में विफलता को जिम्मेदार ठहराया है, तो राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री आदित्य ठाकरे ने इसके लिए केन्द्र को जिम्मेदार ठहराया। दरअसल महाराष्ट्र में पहले से लॉकडाउन 30अपै्रल तक बढ़ाया जा चुका है लेकिन राज्य सरकार श्रमिकों को घर भेजने के लिए ट्रेन चलाने की मांग कर रही है। अचानक लॉकडाउन बढ़ने के कारण असुरक्षा और जेब खाली होने की चिंता में हजारों प्रवासी श्रमिक सड़क पर उतर आये।
राज्य सरकार अपना सिर छिपाने के लिए भले ही कहे कि प्रवासी श्रमिक भोजन के बजाय घर जाना चाहते हैं, लेकिन इससे उसकी विफलता उजागर हो गयी है। श्रमिकों को अनाज, जरूरी सुविधा और नकद राहत देने की जरूरत है। अगर इसके बाद भी श्रमिक लॉकडाउन तोड़ते हैं तो उनको बलपूर्वक वापस किया जा सकता है। महाराष्ट्र सरकार को लॉकडाउन की मंशा को अच्छी तरह से समझना चाहिए।
कोरोना संक्रमण से प्रभावित मुंबई से अगर हजारों श्रमिक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों में जायेंगे तों यहां के सुरक्षित क्षेत्रों में भी यह महामारी फैल जायेगी। इसलिए सरकार को आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर तत्काल श्रमिकों को राहत देने का काम करना चाहिए। सबको अनाज देने व नकद रुपये देने के साथ सामूहिक भोजनालय चलाना चाहिए। अगर पेट की भूख शांत होगी तो लोग कानून भी नहीं तोड़ेंगे।





