back to top

अधिकमास 17 से, शुभ कार्यों पर लग जायेगा विराम

इसकी शुरूआत 17 मई से होकर 15 जून तक रहेगी
लखनऊ। इस वर्ष अधिक मास का शुभ और धार्मिक रूप से विशेष महत्व देखने को मिल रहा है। इसकी शुरूआत 17 मई से होकर 15 जून तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह समय पूरी तरह से आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और भक्ति को समर्पित माना जाता है। इस अवधि में स्नान-दान, यज्ञ, हवन और तप जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। दिलचस्प बात यह है कि जिस समय को सामान्य रूप से शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, उसी समय को भगवान विष्णु ने अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा दिया। आइए जानते हैं कि अधिक मास क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास।

क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास?
हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास एक ऐसा विशेष समय होता है जिसका कोई स्थायी अधिपति देवता नहीं माना जाता। इसी कारण इसे पहले देव-पूजन और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था और यह त्याज्य मास के रूप में जाना जाता था। मान्यता के अनुसार जब इस मास को उपेक्षित और अशुभ समझा जाने लगा, तब इसकी पीड़ा देखकर स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने इसे अपना संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने इस मास को अपना नाम देते हुए पुरुषोत्तम मास घोषित किया और कहा कि अब यह मास भी उन्हीं के नाम से जाना जाएगा। भगवान विष्णु ने यह भी आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त इस अवधि में जप, तप, दान और भक्ति करता है, उसे सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होगा। इसी दिव्य कृपा के कारण अधिक मास को आज अत्यंत पवित्र और फलदायी समय माना जाता है, जो आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर प्रदान करता है। अधिक मास में क्या करें और क्या न करें

अधिक मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक साधना का समय माना गया है, इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए और कुछ धार्मिक कार्यों को अपनाना चाहिए। इस अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, मुंडन या नामकरण संस्कार करना वर्जित माना गया है। नया घर खरीदना या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य भी इस महीने में टालने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि अधिक मास में कोई नया व्रत या बड़ा संकल्प शुरू नहीं करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर यह समय भक्ति और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करना बहुत पुण्यदायी माना गया है। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फल देने वाला होता है। दान, दीपदान, पूजा-पाठ और सेवा कार्य करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

RELATED ARTICLES

कजरी तीज कल, सुहाग के लिए महिलाएं रखेंगी व्रत

लखनऊ। कजरी तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और...

स्नान-दान का प्रतीक सावन माह की पूर्णिमा आज

लखनऊ। हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है और इस माह में पड़ने वाली पूर्णिमा का भी खास महत्व होता...

वरलक्ष्मी व्रत आज, विधि-विधान से होगी मां लक्ष्मी की पूजा

लखनऊ। हर साल सावन महीने के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत मनाया जाता है। यह दिन मां लक्ष्मी के वरलक्ष्मी रूप को समर्पित है।...

रक्षाबंधन पर्व : राखी बांधकर बहनों ने भाइयों से लिया रक्षा का वचन

लखनऊ। शुक्रवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई को तिलक लगाकर कलाई पर रक्षा...

251 जोड़ों ने एक साथ किया आचार्य सुबल सागर महाराज का ‘पड़गाहन’

लखनऊ। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में एक अलौकिक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। यहाँ...

इस्कॉन मंदिर में धूमधाम से मना बलराम पूर्णिमा महा महोत्सव

लखनऊ। अंतराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) मंदिर, लखनऊ में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी शुक्रवार को श्री बलराम पूर्णिमा महा महोत्सव धूम-धाम...

आशियाना जैन मंदिर में रक्षाबंधन पर्व पर लोगों ने लिया मुनियों की रक्षा का वचन

भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक धूमधाम से मनाया गया लखनऊ। आशियाना दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे वषार्योग के दौरान रक्षाबंधन पर्व श्रद्धा एवं भक्ति...

कजरी तीज कल, सुहाग के लिए महिलाएं रखेंगी व्रत

लखनऊ। कजरी तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और...

भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन आज, बाजार गुलजार

पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा लखनऊ। भाई-बहन...