एसएनए के वाल्मीकि रंगशाला में नाटक का मंचन
लखनऊ। विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में संभव सेवा समिति लखनऊ द्वारा प्रस्तुत नाटक बिखरे बिम्ब का मंचन एसएनए के वाल्मीकि रंगशाला में किया गया। नाटक की परिकल्पना व निर्देशन विपिन कुमार ने किया।
नाटक बिखरे बिम्ब मंजुला नायक नामक स्त्री, उसकी विकलांग बहन और उसके पति की कहानी है, कत्रड़ लेखिका मंजुला नायक, कन्नड़ भाषा में ही अपना लेखन कार्य करती है, किंतु मात्र एक उपन्यास अंग्रेजी भाषा में लिखकर सारे लेखन जगत को चौका देती है, मंजुला के इस उपन्यास की चचार्एं विश्व स्तर पर हो रही है इस उपन्यास के जरिए उसे आर्थिक लाभ भी बहुत ज्यादा हो रहा है, लेखन जगत में मंजुला को बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त हुआ है, यह उपन्यास लिखना कैसे संभव हो पाया आदि बातों पर चर्चा करने के लिए एक टी वी चैनल के स्टूडियो में मंजुला नायक को आमंत्रित किया गया हैं वो लेखन के विषय में इंटरव्यू में बताती हैं कि इस उपन्यास का विचार उनको कब कहां कैसे आया इसकी क्या ऐसी खूबियां है किस वजह से यह उपन्यास विश्वस्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, वरिष्ठ लेखकों का उनके प्रति क्या व्यवहार हैं आदि आदि, अपना इंटरव्यू खत्म करने के पश्चात अचानक उनका अंतर्मन (बिम्ब) उनके सम्मुख प्रकट होता है और उनकी कही हुई तमाम बातों की सच्चाई जानने के लिए विचार विमर्श के लिए विवश करता है, इस उपन्यास के लेखन में क्या सच्चाई है क्या झूठ है सच सामने लाने का निरंतर प्रयास करता है बिम्ब मंजुला को इतना ज्यादा उत्तेजित कर देता है कि वह स्वयं इस बात को स्वीकार करती है कि जो उपन्यास विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है वह उसने नहीं, बल्कि उसकी छोटी बहन मालिनी ने लिखा है जो कि अब इस दुनिया में नहीं है मंजुला अपनी छोटी बहन की महान कृति को चुराकर अपने नाम से प्रकाशित करवाने के पीछे की तमाम वजहों को एक-एक कर पेश करती रहती है। नाटक में अहम भूमिका शीलू मलिक, सचिन सिंह और चारु शुक्ला ने किया।





