लखनऊ। सावन माह के छठे सोमवार को लेकर राजधानी के सभी शिव मंदिरों में तैयारी पूरी हो गई हैं। देर रात से ही मंदिर रोशनी से जगमगा उठे। श्रद्धालुओं की कतार भी रात से लग गई। राजेन्द्रनगर स्थित महाकाल मंदिर में रात 12 बजे कपाट खुल जाएंगे। बाबा की विशेष पूजा और श्रृंगार होगा। इसके बाद उज्जैन स्थित महाकाल की तर्ज पर विशेष आरती और शृंगार होगा। आरती के बाद भक्त जल व दुग्धाभिषेक कर सकेंगे।
चौक स्थित कोतवालेश्वर मंदिर में रोज की तरह जलाभिषेक से पूजन की शुरूआत होगी। बाबा का फल फूल और मेवे से श्रृंगार होगा। सुबह और शाम भोलेनाथ की भव्य आरती होगी। उधर, सदर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग के कपाट सुबह पांच बजे खुल जाएंगे। भोलेनाथ का भव्य श्रृंगार होगा। भक्त भोलेनाथ, मां पार्वती और गणेश जी के एक साथ दर्शन कर सकेंगे। डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में देर रात से ही भक्तों की भीड़ जुटने लगी। 51 लीटर दुग्ध से भोलेनाथ का अभिषेक होगा। भोर में चार बजे भोलेनाथ की आरती के साथ मंदिर के कपाट खुलेंगे। भोलेनाथ नग जणित पगड़ी पहन कर दर्शन देंगे। भीड़ को काबू में करने के लिए सेवादार तैनात रहेंगे। भक्त, जल, दुग्ध, बेलपत्र, धतूरा अर्पित कर भोलेनाथ का पूजन करेंगे।
भगवान शिव को समर्पित सावन माह में भोलेनाथ के दर्शन की कामना कर भक्त शिव मंदिरों की ओर से रुख करते हैं। देश के कोने.कोन में कुल 12 ज्योतिर्लिंग स्थित हैं। यदि आप सुदूर यात्रा नहीं कर पा रहे हैं तो सदर इलाके में द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर आएं। यहां भोलेनाथ के 12 स्वरूपों के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक भी करता है। शिवार्चन और रुद्राभिषेक के साथ ही भगवान शिव को चढ़ने वाला जल सीधे जमीन में जाकर भूजल स्तर बढ़ाता है।
मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन का पुण्य एक स्थान पर मिलता है। राजधानी में अपनी तरह का ऐसा पहला मंदिर है, जहां जल चढ़ाने के लिए आपको गंगाजलयुक्त शुद्ध जल शिवलिंग के पास ही मिल जाता है। शिवलिंग पर चढ़ा जल नालियों के बजाय सीधे रीचार्जिंग के लिए जमीन में चला जाता है। मंदिर कमेटी के पदाधिकारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि मंदिर में परिवार के साथ रुद्राभिषेक करने की पूरी व्यवस्था रहती है। एक साथ 12 परिवार मंदिर में बैठकर रुद्राभिषेक करते हैं।
भोले बाबा का होगा विशेष शृंगार
सदर बाजार स्थित द्वादश ज्योर्तिलिंग धाम में सावन के छठे सोमवार पर भोलेनाथ का विशेष शृंगार होगा तथा 13 परिवारों द्वारा महारुद्राभिषेक पूजन पं. मगलू पाधा के सानिध्य में होगा। मन्दिर समिति के अध्यक्ष राजेश चन्द्र अग्रवाल ने बताया कि मन्दिर सुबह पांच बजे खुल जायेगा और भक्तों के लिए सभी ज्योर्तिलिंगों पर गंगाजल से अभिषेक करने की सुविधा रहेगी। उन्होने बताया भोलेनाथ पर चढ़ा हुआ दुध बाद में भक्तों को प्रसाद के रुप में बांट दिया जाता है। रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने रुद्राभिषेक कराया।
यहां भी होंगे आयोजन
चैपटिया स्थित प्राचीन बड़ा शिवाला में पूरे सावनभर भोलेनाथ का फूलों से शृंगार होगा। तथा आचार्यो द्वारा रुद्राभिषेक का आयोजन किया जायेगा। नादान महल रोड पर स्थित सिद्धनाथ मन्दिर सजावट व भोलेनाथ का श्रंगार देखने वाला होता है। प्राचीनकाल से चला आ रहा यहां का रुद्राभिषेक प्रसिद्ध है। प्रत्येक सोमवार को करीब 50 लीटर दुध से भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। चौक स्थित कोनेश्वर महादेव मन्दिर में कई कुंटल फूलों से भोलेनाथ का शृंगार और रुद्राभिषेक होगा। आगामीढ़ ढ्योढ़ी सुभाष मार्ग स्थित महामंगलेश्वर महादेव मन्दिर सावन के छठे सोमवार को गेंदा, गुलाब, चांदनी आदि फलों से मन्दिर को सजाया जाएगा। मोहान रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मन्दिर में पूरे सावन भर तथा सावन के बुधवार को यहां मेला लगेगा। खदरा के आशुतोष शिव मन्दिर के महंत सुरेन्द्र दास ने बताया कि सावन के सभी सोमवार को ओम नम: शिवाय का संगीतमय पाठ होगा।
चार शुभ योग में होगी भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना
लखनऊ। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे उत्तम माना गया है। इस माह में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। वैसे तो यह पूरा महीना विशेष फलदाई है, लेकिन सावन में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार का अलग ही महत्व होता है। इस साल सावन में कुल 8 सोमवार पड़ रहे हैं, जिसमें से पांच सोमवार बीत चुके हैं। छठा सोमवार 14 अगस्त को है। इस बार छठे सोमवार पर कई शुभ योग बन रहे हैं। छठा सावन सोमवार व्रत बड़ा ही शुभ फलदायी है क्योंकि उस दिन अधिक मास की शिवरात्रि भी है। इस दिन व्रत रखकर शिव पूजा करने से आपको दोगुना फल मिलेगा। छठे सावन सोमवार व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, सिद्धि योग और पुनर्वसु एवं पुष्य नक्षत्र का संयोग बना है।
सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। सुबह से ही शिव भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर दूध, जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से सावन सोमवार व्रत करता है और भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करता है उसपर शिव शम्भू के साथ मां पार्वती भी प्रसन्न होती हैं।
छठा सावन सोमवार पर मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 50 मिनट से सुबह 05 बजकर 34 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 07 मिनट से शाम 19 बजकर 29 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 08 बजकर 27 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक
छठा सावन सोमवार पर शुभ योग
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 11:07 बजे से 15 अगस्त को सुबह 05:50 बजे तक
सिद्धि योग- प्रात:काल से लेकर शाम 04:40 बजे तक
पुनर्वसु नक्षत्र- सूर्योदय से सुबह 11:07 बजे तक
पुष्य नक्षत्र- सुबह 11:07 बजे से 15 अगस्त को दोपहर 01:59 बजे तक
छठा सावन सोमवार व्रत के दिन भद्रा
छठे सावन सोमवार व्रत वाले दिन भद्रा का साया है। उस दिन भद्रा सुबह 10:25 बजे से लग रही है और यह रात 11:32 बजे तक रहेगी। इस भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर होगा। इस वजह से आप कोई भी शुभ कार्य न करें क्योंकि उस पर भद्रा का दुष्प्रभाव हो सकता है। जब भद्रा पाताल या स्वर्ग की होती है तो उसे अनदेखा कर सकते हैंए लेकिन पृथ्वी लोक की भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं।
सावन सोमवार पूजा सामग्री
सावन माह में सोमवार पूजा के लिए फूल, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री लें।
सावन सोमवार पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही देवी पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं। पंचामृत से रुद्राभिषेक करें और बेल पत्र अर्पित करें।
शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं। इसके बाद शिव जी के साथ माता पार्वती और गणेश जी को तिलक लगाएं। प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी-शक्कर का भोग लगाएं। आखिर में धूप, दीप से भगवान भोलेनाथ की आरती करें और पूरे दिन फलाहार हर कर शिव जी का स्मरण करते रहें।





