लॉकडाउन के कारण लंबे समय तक बंद रही आर्थिक गतिविधियो ने आम आदमी के सामान्य जीवनयापन में अनेक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जिसे आसान करने, राहत पहुंचाने और अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाने के लिए केन्द्र सरकार अनेक उपाय कर रही है। पीएम गरीब कल्याण योजना के जरिए गरीबों को राहत देने के साथ ही उद्योग जगत को भी कई तरह ही सहूलियत एवं रियायत उनके कामकाज को फिर से सामान्य बनाने का प्रयास हो रहा है।
इसी कड़ी आज केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने उज्ज्वला गैस योजना, ईपीएफ कंट्रीब्यूशन और रेंटल हाउसिंग को लेकर कई प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इससे गरीबों को बड़ी राहत मिलेगी। लॉकडाउन के बाद घोषित पीएम गरीब कल्याण योजना में उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारकों को अप्रैल, मई एवं जून माह में तीन सिलेण्डर नि:शुल्क देने की घोषणा की गयी थी जिस पर 13,500 करोड़ खर्च होने थे। चूंकि गरीब गैस का उपयोग कम करते हैं और इसलिए उनके गैस एक महीने से अधिक चलते हैं। इस कारण बड़ी संख्या में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने तीन महीने के दौरान सभी तीन नि:शुल्क गैस सिलेण्डर नहीं लिया था।
इससे उनको योजना का पूरा लाभ नहीं मिल सका। अब सरकार ने गैस सिलेण्डर लेने की समय सीमा को सितम्बर तक बढ़ा दिया है। इससे उज्ज्वला लाभार्थी बाकी बचे नि:शुल्क सिलेण्डर लेकर योजना का शत-प्रतिशत लाभ उठा पायेंगे। लॉकडाउन के कारण कई उद्योग और उनके श्रमिक संकट में हैं, पीएम रेंटल हाउसिंग स्कीम प्रवासी श्रमिकों और कुछ हद तक रियल एस्टेट सेक्टर को भी राहत देगी। इसमें औद्योगिक एरिया में श्रमिकों के लिए पीएम आवास योजना के तहत अफोर्डेबल रेंटल काम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव है।
इससे श्रमिकों को सस्ते में कार्य स्थल के निकट किराये का घर मिलेगा और उनका जीवन आसान होगा। श्रमिक कल्याण योजना के तहत केन्द्र सरकार ने छोटी कंपनियों एवं कम वेतन वाले श्रमिकों का तीन महीने तक ईपीएफ कंट्रीब्यूशन देने का फैसला किया था जिसे तीन महीने और बढ़ाकर अगस्त तक करने को मंजूरी दी गयी है। इस योजना में छोटी कंपनियों एवं उनमें कम वेतन पाने वाले श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
दरअसल लॉक डाउन के कारण अर्थव्यवस्था में शिथिलता आयी है और सबसे ज्यादा प्रभावित एमएसएमई सेक्टर है। ऐसे में छोटी कंपनियों एवं उनके कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों का ईपीएफ सरकार खुद देगी। इससे जहां कंपनियों को ईपीएफ कंट्रीब्यूशन से और तीन महीने तक राहत मिलेगी वहीं श्रमिकों का ईपीएफ भी जमा होता रहेगा और तीन महीने तक वेतन से कटेगा भी नहीं। इससे श्रमिकों के खाते मे वेतन के रूप में 12 प्रतिशत अतिरिक्त आयेंगे जिससे वे अपनी महत्वपूर्ण जरूरतें मसलन बच्चे की फीस, कपड़े, खानपान और अन्य जरूरी चीजो पर व्यय कर सकेंगे।
ईपीएफ कंट्रीब्यूशन से 72 लाख गरीब मजदूरों एवंउनके परिवार को राहत मिलेगी और यह बड़ी मदद है। कोरोना महामारी ने हमारी अर्थव्यवस्था को बहुत क्षतिग्रस्त किया है और इससे गरीब सर्वाधिक प्रभावित हैं। ऐसे में सरकार कभी अन्ना योजना से, जनधन से, फ्री गैस सिलेण्डर से, ईपीएफ देकर और सस्ते घर सुलभ कराकर उनकी मदद करने का जो प्रयास कर वह एक लोक कल्याणकारी राज्य में सरकार दायित्व होता है। सरकार इसे सम्यक तरीके से निभाने की कोशिश कर भी रही है।





