प्रदेश में शिक्षा की दशा और दिशा को सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार एक के बाद एक अभिनव पहल कर रही है। प्राथमिक विद्यालयों में अंग्रेजी पढ़ाने, छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ाने, उच्च शिक्षा से लेकर माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा तक, करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नियुक्ति करने, प्रशासनिक, मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं सैन्य सेवाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने के बाद अब एक और बेहतरीन फैसला किया है जिससे एक साथ अनेक समस्याओं का समाधान हो जायेगा।
दरअसल प्रदेश सरकार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को साल में दो यूनिफार्म सेट के साथ ही सर्दी में स्वेटर, जूता, मोजा भी उपलब्ध कराती है। इन सभी मदों में सरकार ने रकम निर्धारित कर दी है, लेकिन जब स्कूल खुलते हैं तो प्राय: सत्र शुरू पर बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल पाते हैं। दो-तीन महीने बाद जब यूनिफार्म आता है तब तक बच्चों को पुराने से ही काम चलाना पड़ता है। बड़ी संख्या में छात्र बिना यूनिफार्म के ही चले जाते हैं।
इसी तरह सरकार स्वेटर देती है लेकिन सर्दी शुरू होने पर नहीं मिल पाता, जब तक टेंडर करती है, सप्लायर तय करती है तब सर्दी बीत जाता है और जब बच्चों को स्वेटर मिलता है तब तक गर्मी शुरू हो जाती है। यह देरी दरअसल सरकारी खरीद प्रक्रिया के कारण है जिसमें टेंडर लगाने, अधिकारियों का कमीशन फिक्स होने आदि में समय लगता है और जब अधिकारी सब कुछ तयतोड़ कर लेते हैं तब जाकर टेंडर पास होता है।
इससे एक तो भ्रष्टाचार पनपता है और दूसरे छात्रों को समय पर यूनिफार्म नहीं मिलता है। कई बार घटिया कपड़ों से बना यूनिफॉर्म मिल जाता है। इस व्यवस्था से छुटकारा पाने के लिए प्रदेश सरकार ने यूनिफॉर्म का पैसा छात्रों को नकद देने का फैसला किया है। यह एक ऐसी पहल है जिससे भ्रष्टाचार भी खत्म हो जायेगा, यूनिफॉर्म भी अच्छा मिलेगा और जब जरूरत होगी तब छात्र खरीद सकेंगे और इस तरह हर साल स्कूल खुलने पर यूनिफार्म को लेकर शुरू होने वाली खरीद प्रक्रिया, टेंडर, कमीशन लेट-लतीफी सब खत्म हो जायेगी।
छात्रों को शिक्षा सत्र शुरू होने पर पैसा मिलेगा और वे समय पर यूनिफॉर्म स्वयं खरीद लेंगे। यूनिफॉर्म का पैसा नकद देने का फैसला इसलिए भी सराहनीय है कि धीरे-धीरे कैश-ट्रॉसफर की तरफ देश बढ़ रहा है। ऐसे में सभी सुविधाओं एवं सेवाओं को जिसमें लागत लगती है उसके लाभों को उनके पात्रों तक कैश ट्रॉसफर करना जरूरी है, क्योंकि सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार होता ही होता है। प्रदेश के स्कूलों में यूनिफॉर्म को सुधारने की भी जरूरत है।
प्रदेश सरकार को चाहिए कि सीबीएसई की तरह किसी अच्छे डिजाइनर से पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए कम तीन-चार डिजाइन तैयार कराये। प्राथमिक विद्यालयों के लिए अलग तरह का यूनिफार्म हो और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए अलग। साथ ही छात्र-छात्राओं के लिए भी अलग-अलग डिजाइन हो। इस तरह डिजाइन तय हो और दुकानों पर वितरण के लिए उपलब्ध करायी जायें। सत्र शुरू होने पर सरकार पैसा छात्रों को भेजे और छात्र अपनी मनपसंद की दुकान से यूनिफॉर्म खरीद लें, इस तरह तमाम समस्याओं का एक साथ समाधान हो जायेगा।





