जलेगा विदेशी निर्भरता, नस्लवाद और जातिवाद का रावण
लखनऊ। बुधवार को ऐशबाग रामलीला के मंचन मे हनुमान जी लंका दहन के उपरांत वापस लौटते हैं और भगवान श्रीराम को माता सीता की खोज से लेकर लंका दहन तक का वृतांत सुनाते हुए वह चूड़ामणि देते हैं जो माता जानकी ने उन्हे लंका से वापस आते समय दी थी उसे देख श्रीराम व्यथित हो जाते हैं और उसके बाद सभी लंका पर चढाई करने की योजना बनाते हैं । उधर लंका के दरबार से बहिस्कृत हो रावण का भाई विभीषण भी श्रीराम की शरण में आ जाता है और प्रभु उसे अपना मित्र बनाने के उपरांत उसका राजतिलक कर उसे लंका का राजा घोषित कर दिया ।
जो संपति सिव रावनहि, दीन्हि दिएँ दस माथ। सोइ संपदा बिभीषनहि, सकुचि दीन्हि रघुनाथ॥ इसके उपरांत श्रीराम युद्ध की तैयारी कर समुद्र से लंका जाने हेतु मार्ग की आकांक्षा के साथ तीन दिनों तक समुद्र की याचना करते हैं परंतु कोई नतीजा नही निकलता देख उन्हे समुद्र पर क्रोध आ जाता है ।
विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीति।
बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीति।।
यह देख भय से कांपते समुद्र देव प्रकट होते हैं हैं और श्रीराम को उनकी सेना में उपस्थित दो विश्वकर्मा पुत्र नल और नील के बारे में बताते हैं जिन्हे ऋषि श्राप था की उनके फेंके पत्थर पानी में नही डूबेंगे यदि उनके द्वारा सेतु निर्माण किया जा सके तो समुद्र तक सेतु का निर्माण कर लंका तक जाया जा सकता है यह सुनते ही वानर सेना में हर्ष छा गया मानो बस वे लंका लंका में विध्वंस को उत्सुक हों। लंका पहुंच कर श्रीराम द्वारा अंगद को शांति प्रस्ताव हेतु भेजा जाता है जहाँ रावण अंगद संवाद और अंगद द्वारा रावण दरबार मे पैर जमाने की लीला ने दर्शकों को खूब हर्षित किया। इसके बाद प्रभु राम युद्ध की घोषणा कर देते हैं और फिर होता है गुरुमुख वध राजकुमार पुहस्त वध और कुंभकर्ण को नींद से जागृत करने का क्रम और रावण कुंभकर्ण संवाद जहाँ वह बड़े भाई को श्रीराम से बैर न लेने की सलाह देता है पर रावण उसे ठुकरा देता है । इसके बाद कुंभकर्ण विवश हो युद्ध के लिए आ जाता है जहाँ उसका विभीषण से वार्ता का दृश्य दिखाया जाता है इसके बाद युद्ध के लिए आए कुंभकर्ण का श्रीराम ने अपने इंद्रास्त्र से वध किया इसके बाद क्रोध से भर कर युद्ध के मैदान में उतरा रावण का पुत्र मेघनाथ श्रीराम और लक्ष्मण को अपने नागपाश में बांध देता है ।
ऐशबाग श्रीरामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया की गुरुवार को दहशरा पर्व के अवसर पर 65 फिट का रावण दहन किया जाएगा जिसकी थीम विदेशी निर्भरता, नस्लवाद एवं जातिवाद का समूल विनाश होगा इस पुतले में स्वदेशी ईको फ्रेंडली पटाखे लगाए जाएंगे । रावण का पुतला रमेश और गणेश ने तैयार किया है । इसके अलावा मंच पर लक्ष्मण शक्ति लगने और हनुमान जी द्वारा संजीवनी की खोज मे द्रोणागिरी पर्वत लाने के साथ ही मेघनाथ औ रावण वध तक की लीला का मंचन किया जाएगा।
सांस्कृतिक मंच की पहली प्रस्तुति अनुरूप डांस अकादमी द्वारा कलावाणी अनुष्का श्रीवास्तव के निर्देशन में राम चन्द्राय, हनुमान चालीसा, हनुमंत बलवीरा, व राम-राम जय राजा राम जैसे गीतों को रक्षिता, गुनगुन, माही, कशिश, दिव्यांशी और अंशिका ने अपने नृत्य से मंच पर सजाया। दूसरी प्रस्तुति अवध में राम आए हैं पर दी गई जिसे सपना सिंह के निर्देशन केसर, अंकिता, मनीषा, सोनाली, प्रेमा, अधिता, निखिल, अभिषेक, रोहित और सत्यम ने समूह नृत्य के माध्यम से मंच पर उतारा जिसे दर्शकों ने भी खूब सराहा ।
महानगर रामलीला मे अंगद रावण संवाद लीला का मंचन
45 फुट रावण, 40 फुट मेघनाद के पुतले का आज होगा दहन
लखनऊ। महानगर मे चल रही रामलीला महोत्सव में बुधवार को समुद्र में सेतुबंध प्रसंग, विभीषण द्वारा अपने भाई रावण से अहंकार त्याग माता सीता को लौटने का आग्रह और उसके उपरांत रावण द्वारा विभीषण को लात मार कर लंका से निकलने का प्रसंग, प्रभु राम द्वारा लंका पति रावण को पुन: समझने के लिए अंगद को दूत बनाकर भेजा जाता है। रावण अंगद से पूछता है कि तू कौन कहां का है बानर खंडित करके मेरी आज्ञा तू तू यहां चला आया बानर तब अंगद कहते हैं। मेरा भी परिचय सुन ले अब मैं दूत राम रघुवर का हूं, थे मित्र आपके पिता मेरे इस हित से दौड़ा आया हूं इस उल्टी राजसभा में समझाने आपको आया हूं अंगद के बार-बार समझाने पर रावण अहंकार और अभियान में डूबा रहता है और अंदर से कहता है कि तेरे श्री राम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं मैं नीति धर्म का ज्ञाता हूं,दाता हूं ,विद्वान हूं, बलशाली हूं*सब अंगद कहते हैं कि तुम मेरा पांव ही उठा दो तो मैं तुम्हारी बातों को मानूंगा। रावण अपनी सैनिकों से कहता है कि इस बंदर के पैर को जमीन में पटक दो कोई भी योद्धा अंगद के पर को खिसका नहीं पता है और फिर अपने पुत्र मेघनाद को भेजता है वह भी जरा भी नहीं हटा पता है। अंत में रावण जैसे ही अंगद के पैर पर छोटा है तो अंदर अपना पैर हटा लेता है और कहता है की है तू दूत के पांव न पड़ रावण, तू प्रभु राम के पांव पड़ तो तेरा कल्याण हो जाएगा। और रावण लज्जित होकर अपनी सिंहासन पर बैठ जाता है। इसी के साथ उपस्थित जनसमूह द्वारा तालियां बजाकर अंगद रावण संवाद कि सराहना की जाती है। रावण का अभिनय भास्कर जोशी अंगद का अभिनय नवीन पांडे मेघनाद का अभिनय पंकज त्रिपाठी विभीषण का अभिनय कुणाल पन्त और महावीर हनुमान का अभिनय महेंद्र पंत द्वारा किया गया। श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष ललित मोहन जोशी महासचिव गिरीश चंद्र जोशी और मुख्य संयोजक दीपक पांडे ने संयुक्त रूप से बताया कि रामलीला समिति द्वारा दशहरे के अवसर पर 2 अक्टूबर को इस वर्ष सांयकाल 8:00 बजे राम कुंभकरण युद्ध लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध और राम रावण युद्ध के उपरांत आतिशबाजी के साथ रामलीला मैदान में 45 फुट रावण के पुतले एवं 40 फुट के मेघनाद के पुतले का दहन किया जाएगा। दशहरे के अगले दिन दिनांक 3 अक्टूबर को राम विजय की शोभायात्रा के साथ भारत मिलाप एवं राजगद्दी का आयोजन किया जाएगा।
क्यों नहीं पकड़ता रामचरण इसमें क्यों लज्जा खाता है…
लखनऊ। सेनापति अगर चाहते हो तो अनेकों है रामदल में, दो-चार नहीं सैकड़ों है पर शायद ही कोई स्वीकार करे तेरे इस मैले गहनें को, नारियां चुराई जायें जहां ऐसे कुराज्य में रहने को… सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कालोनी में चल रहे 33वें रामलीला के पांचवें दिन बुधवार को मां दुर्गा जी की आरती से मंचन का शुभारंभ हुआ। जिसके पश्चात कलाकारों ने विभीषण शरणागति, अंगद का लंका प्रस्थान, राजकुमार वध, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुम्भकरण वध का मंचन किया।
जब रावण का कोई भी योद्धा अंगद का पैर नहीं उठा पाता है तो रावण स्वंय राजगद्दी से उठता है तब अंगद कहते है हे रावण मेरा पैर पकड़ क्यों अपनी शान घटाता है, क्यों नहीं पकड़ता रामचरण इसमें क्यों लज्जा खाता है। मैं तुम्हें नहीं क्षमा कर सकता हूं पर इतनी सेवा कर सकता हूं, हां प्रभु से क्षमा दिला दूंगा, प्रभु से इतना कह सकता हूं…। समिति के अध्यक्ष सुरेश तिवारी व महामंत्री जितेंद्र मिश्र ने बताया कि गुरुवार को रावण वध, श्रीराम राज्याभिषेक व पारितोषिक वितरण के साथ 6 दिवसीय रामलीला का समापन होगा।





