हार्ट व कई बीमारियों से बचाता है रक्तदान : डा. वीके शर्मा
स्वैच्छिक रक्तदान दिवस आज
वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। रक्तदान करने से न सिर्फ किसी की जान बचायी जा सकती है बल्कि इससे खुद की सेहत भी अच्छी रहती है। जो लोग समय-समय पर रक्तदान करते हैं उन्हें हार्ट व अन्य बीमारियां होने का खतरा कम होता है।
डा. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ब्लड बैंक प्रभारी डा. वीके शर्मा का कहना है कि जो लोग नियमित रूप से रक्तदान करते हैं उनकी सेहत दूसरों के मुकाबले अच्छी रहती है। रक्तदान करने से वैसे तो कई फायदे हैं लेकिन सबसे बड़ी बात है कि किसी का जीवन बचाने की जो मानसिक संतुष्टि मिलती है, उसका पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रक्तदान के फायदे गिनाते हुए उन्होंने बताया कि नियमित रक्तदान करने वालों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका पांच फीसदी तक कम होती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से बोनमैरो सक्रिय हो जाता है।
शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है। इससे मरीज सेहतमंद रहता है। इसके साथ ही रक्तदान करने से खून गाढ़ा नहीं होता, इससे शरीर में रक्तप्रवाह सही बना रहता है और हार्ट सम्बन्धी बीमारियों होने की सम्भावना कम होती है। रक्त दान करने से आयरन की मात्रा बैलेंस रहती है। रक्तदान करने के कुछ समय बाद लाल रक्त कणिकाओं को लेवल बराबर हो जाता है। वह बताते हैं कि जो लोग ब्लड डोनेट करते हैं उनके शरीर में खून की कमी पूरी करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
डा. शर्मा का कहना है कि रक्तदान डोनर के शरीर में किसी तरह की कमी नहीं लाता, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद है। औसतन एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में उसके वजन के हिसाब से 7 प्रतिशत रक्त होता है। यानी 10 यूनिट या 5 से 6 लीटर रक्त होता है। वजन के हिसाब सें डोनर एक बार में 350 मिलीलीटर से 450 मिलीलीटर रक्तदान कर सकता है। बोनमैरो में नियमित रूप से बनने वाले इस रक्त की आपूर्ति डोनर के शरीर में हालांकि 48 घंटे में हो जाती है। फिर भी रक्त के प्रमुख कंपोनेंट बनने में तकरीबन 3 महीने लग जाते हैं। 3 महीने बाद डोनर पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है और चाहे तो दोबारा रक्तदान कर सकता है। पुरुष डोनर साल में 4 बार और महिलाएं 3 बार आसानी से रक्तदान कर सकते हैं।





