विभाग की ओर से तकनीकी सलाहकार के पद को एक साल बढ़ाने की मांग पर अभियंताओं में रोष
- पूर्व में विभागीय नीतियों पर उठे सवाल, वापस लिये गये फैसले
विशेष संवाददाता
लखनऊ। बीते वर्षो में देखने में आया है कि लोक निर्माण विभाग में तकनीकी सलाहकार का पद स्वीकृत होने के बाद से तकनीकी नीतियों को तैयार करके अमल में लाने के लिए कैबिनेट की बैठक से निर्णय कराने के बाद और उच्च स्तर से अनुमोदन प्रदान करने के बाद तकनीकी निर्णय वापस लेने पड़ रहे। इसके बावजूद तकनीकी सलाहकार वीके सिंह का पुन: एक वर्ष का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी चल रही है, जिसको लेकर अभियंताओं में रोष व्याप्त हो रहा है। हालांकि यह विरोध दबी जुबा में ही चल रहा है, पद को देखते हुए कोई भी खुलकर बोलने में कन्नी काट रहा है।
- समस्त मार्गों के अनुबंधों में 05 वर्षीय अनुरक्षण के लिए भुगतान प्रक्रिया का मानकीकरण :
विभिन्न श्रेणी के मार्गो के नव निर्माण एवं अनुरक्षण के लिए दोष निवारण अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) तथा नवीनीकरण चक्र/निर्माण एवं अनुरक्षण तथा अनुरक्षण लागत के संबंध में निर्देश शासनादेश 16.01.2024 निर्गत कराया गया। इस शासनादेश को लागू करने के पूर्व मंत्रि परिषद से अनुमोदन भी प्राप्त किया गया।
इसके विपरीत ठेकेदार संगठनों द्वारा आपत्ति दर्ज करने तथा क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा व्यवस्था को व्यवहारिक न पाये जाने के कारण विरोध दर्ज किया गया, जिसके बाद प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष एसपी सिंह ने शासनादेश के इतर जाकर पत्र 24.12.2024 निर्गत किया गया कि ऐसे मार्ग जो आईआरसी कोड की परिकल्पना के अनुसार निर्मित नहीं है। उन पर पांच वर्षीय अनुरक्षण का प्राविधान उचित नहीं है और पांच वर्ष के स्थान पर पूर्व की व्यवस्था दो वर्ष ही रखा जाये। यह भी आदेश में उल्लेख अपने आप ही कर दिया गया कि शासन से नवीन व्यवस्था के संबंध में क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को अलग से अवगत कराया जायेगा।
आगणनों में 05 वर्ष की व्यवस्था को शासन से 02 वर्ष कराने का अनुरोध किया गया, इससे एस्टीमेटस को संशोधन करने से कार्यो की स्वीकृति में विलम्ब हुआ है। - एकीकृत दर अनुसूची का निर्धारण:
प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष के पत्र 31.08.2024 द्वारा अंर्तविभागीय बैठक की अध्यक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड एसओआर का प्रस्ताव प्रमुख सचिव, नियोजन विभाग को प्रेषित किया गया। जिसके बाद नियोजन विभाग इस प्रस्ताव को अनुमोदित करके प्रमुख अभियंता (विकास) विभागाध्यक्ष को पत्र 24.09.24 द्वारा लोक निर्माण विभाग को सभी विभागों को प्रसारित करने के लिए प्रेषित किया गया, जोकि 01.11.2024 से लागू की गयी। इस व्यवस्था को लागू होने से हाट मिक्स प्लांट के रेट्स को लगभग 07 गुना तक बढ़ाये जाने पर आपत्ति तथा शिकायते किये जाने पर इंटीग्रेटेड एसओआर संबंधी आदेश को प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष द्वारा पत्र 24.02.25 द्वारा वापस लेना पड़ा है। इस संबंध में मुख्य सचिव द्वारा पत्र 25.02.2025 द्वारा स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। पत्र में यह उल्लेख किया जाना कि लीगल बैकिंग यानि कि फाइनेंशियल हैण्ड बुक में संशोधन अथवा कोई अन्य शासनादेश भी निर्गत नहीं किया गया है। - ठेकेदारों के वर्गीकरण एवं पंजीकरण :
नियमावली 1982 में बिना कैबिनेट से पास कराये मनमर्जी से मुख्यालय स्तर से ही संशोधन प्रमुख अभियंता विभागाध्यक्ष से आदेश जारी कराने नियमावली का खुला उल्लघंन हो रहा और ठेकेदारों के पंजीकरण वं डिबार करने में अनेकों समस्यायें आ रही है। विभाग में ठेकेदारों के पंजीकरण नियमावली 1982 मंत्रि परिषद की बैठक से अनुमोदित होकर जारी हुई। सूत्रों की माने तो तकनीकी सलाहकार द्वारा नियमावली में संशोधन न कराकर अपनी हठधर्मिता के कारण एक प्रस्ताव शासन को भेजकर संशोधन करा दिया गया। उसके बाद से लगातार ठेकेदारों के पंजीकरण तथा डिबार करने को लेकर समय-समय पर आने वाली समस्याओं के दृष्टिगत तकनीकी सलाहकार द्वारा बिना कैबिनेट की मंजूरी के ही लगातार प्रमुख अभियंता, विभागाध्यक्ष से कई कार्यालय आदेश निर्गत कराये जा चुके है।
लेकिन बड़ा प्रश्न यह बना हुआ है कि लोक निर्माण विभाग में वीके सिंह तकनीकी सलाहकार के रहते इस प्रकार के तकनीकी मामलों को वापस क्यों लेना पड़ रहा है और किन कारणों से इनका अब 65 वर्ष की अधिक उम्र पार करने के बाद भी एक वर्ष कार्यकाल क्यों बढ़ाया जा रहा है? सूत्रों की मानें तो तकनीकी सलाहकार के कही भी किसी तकनीकी नीति बनाते समय हस्ताक्षर नहीं होते है और उनकी ओर से मौखिक रूप से दखल किया जाता है लेकिन विभाग की छवि लगातार खराब होती जा रही है। मुख्यमंत्री के पास लोक निर्माण विभाग होने के बावजूद इस प्रकार से विभाग की छवि लगातार खराब हो रही है। चाहें प्रति वर्ष हजारों करोड़ के बजट के समर्पण करने की बात हो अथवा अन्य कोई नीति को अमल में लाने की बात हो, यह चिंता का विषय है।





