अमेरिका हाई टेक्नोलॉजी एवं हथियार करीबी देशो को सरकार के स्तर पर देता है जिस कंपनी से हथियार ख़रीदे जाते है वो बैकसीट पर होती है
यह समझौता सरकार to सरकार का है यह पूरी प्रक्रिया 11 स्टेजो से गुजरती है
अभी यह प्रकिया तीसरी स्टेज पर है
पहला स्टेज : इस स्टेज में सम्बंधित देश से उपकरण और कीमत का अनुमान लगाया जाता है
दूसरा स्टेज : सेना की तरफ से Aon (आवस्यकता की स्वीकृति) की तैयारी की जाती है
तीसरी स्टेज : DAC की तरफ से AON की मंजूरी दी जाती है
चौथा स्टेज : LOA अमेरिकी सरकार को दिया जायेगा
पांचवी स्टेज : अमेरिकी सरकार अपनी तरफ से LOA बनाएगी
छटी स्टेज : इस स्टेज में अमेरिकी संसद से डील के ऑफर का अप्रूवल होगा
सातवीं स्टेज : इस स्टेज में अमेरिका की TCEC ऑफर की जाँच करेगी
आठवीं स्टेज : दोनों देश डील पर मोल भाव करेंगे
नवी स्टेज : डील से जुड़ी फाइल पर CCS बैठक होगी
दसवीं स्टेज : CCS से अप्रूवल, LOA पर साइन होगा
ग्यारहवीं स्टेज : तय समय पर मिलिट्री उपकरण की डिलीवरी होगी
भारत 31 ड्रोन ले रहा है एक ड्रोन की कीमत 812 करोड़ यह डील अमेरिका से भारत के लिए भारत की यह डील अन्य देशों की अपेछा जैसे बेल्जियम, UAE, ताइवान, मोरक्को सबसे सस्ती एवं बेस्ट डील है general एटॉमिक्स के ceo और प्रधान मंत्री मोदी के रिश्तो को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे है वो गलत है डील में जो मोल भाव या एग्रीमेंट होता है वह दोनों देश आपस में करते है डील की जाँच सरकार की अथार्टी ही करती है प्रकिया में संसद को भी शामिल किया जाता है एफएमएस के तहत होने वाली डील दोनों देशो के बीच बातचीत से होती है
इसमें महंगे डैम पर डील होने का सवाल ही नहीं उठता इसको नो प्रॉफिट नो लॉस डील भी कहा जाता है भारत 2016 वर्जन का MQ9B ड्रोन खरीदेगा पुराने MQ9A की तुलना में MQ9B ड्रोन एडवांस है MQ9B ड्रोन एक बार में उड़ान 40 घंटे करेगा वीडिओ क्वालिटी HDR होगी MQ9B ड्रोन की रेंज 9 हजार 300 KM होगी MQ9B ड्रोन veather सेंसर से लैस होगा





