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तुर्किये की संसद ने हजारों कुर्दिश विद्रोहियों को सशर्त आम माफी संबंधी विधेयक को मंजूरी दी

संसद में विधेयक के पक्ष में 468 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 88 सांसदों ने इसका विरोध किया।

अंकारा। तुर्किये की संसद ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसके तहत हजारों कुर्दिश विद्रोहियों को सशर्त आम माफी दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के साथ चल रही शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और देश में दशकों से जारी सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है।

संसद में विधेयक के पक्ष में 468 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 88 सांसदों ने इसका विरोध किया। विधेयक के पारित होने के बाद अब पीकेके से जुड़े उन लोगों को राहत मिलने की संभावना है, जो संगठन के सशस्त्र संघर्ष में शामिल रहे हैं। हालांकि, माफी का लाभ तत्काल नहीं मिलेगा। इसके लिए तुर्किये के अधिकारियों को पहले यह पुष्टि करनी होगी कि पीकेके ने पूरी तरह से हथियार डाल दिए हैं और सशस्त्र गतिविधियों को समाप्त कर दिया है।

पीकेके ने पिछले वर्ष घोषणा की थी कि वह तुर्किये सरकार के खिलाफ दशकों से चलाए जा रहे अपने सशस्त्र विद्रोह को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। संगठन ने शांति प्रयासों के तहत खुद को भंग करने का फैसला भी किया था। इस घोषणा को तुर्किये में लंबे समय से चले आ रहे कुर्द संघर्ष के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया। पीकेके के इस फैसले के पीछे जेल में बंद उसके नेता अब्दुल्ला ओकलान की अपील को महत्वपूर्ण माना जाता है। ओकलान ने संगठन से हथियार छोड़ने और संघर्ष का रास्ता समाप्त करने का आह्वान किया था। इसके बाद तुर्किये सरकार और कुर्द पक्षों के बीच शांति प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

तुर्किये में पीकेके और सरकार के बीच संघर्ष कई दशकों से जारी रहा है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है तथा देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही। ऐसे में संसद द्वारा सशर्त माफी को मंजूरी दिए जाने को शांति प्रक्रिया में एक अहम कदम माना जा रहा है।

हालांकि, इस प्रक्रिया के सामने अभी कई चुनौतियां हैं। माफी लागू करने से पहले पीकेके के हथियार डालने की पुष्टि और संगठन की ओर से अपने वादों का पालन महत्वपूर्ण होगा। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शांति प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बना रहे। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि संसद का यह फैसला तुर्किये और कुर्द समुदाय के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के स्थायी समाधान में कितना प्रभावी साबित होता है।

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