भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, उप क्षेत्रीय कार्यालय, लखनऊ का कार्यक्रम
लखनऊ। भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् एवं उप्र संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ की ओ से क्षितिज श्रृंखला के अंतर्गत कथक नृत्यांगना सुरभि सिंह व समूह ने कथक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। गोमती नगर स्थित अकादमी की वाल्मीकि रंगशाला में उन्होंने गणेश वंदना ह्यओम गणानां त्वा गणपति रचना पर विलंबित तीन ताल में उपज, ठाट, उठान, परन जुड़ी आमद के शानदार उदाहरण पेश किए। इसके बाद महफिल महफिल मैखाने की बात चली पर मनमोहक नृत्य कर आनंदित किया। आखिर में उन्होंने और उनके साथी कलाकारों ने दादरा बिहारी को अपने बस कर पाऊं, और तराना मुगल शैली के अंतर्गत तराना, द्रुत तीन ताल में बंदिशे, शेर की छलांग, परन, तिहाइयां, गत निकास लड़ी एवं कवित्त प्रस्तुत कर खूब प्रभावित किया।
क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार ने कथक प्रेमियों का स्वागत कर आभार जताया। उन्होंने बताया कि सुरभि सिंह 19 वर्षों से अनवरत कत्थक नृत्य विद्या की सेवा में सेवारत हैं। नृत्य कला को अपने कठिन परिश्रम से जीवंत कर नए आयामों को छुआ है और एक सर्वश्रेष्ठ एवं निपुण कलाकार के रूप में कला जगत में स्थान प्राप्त किया हैं। आपने नृत्य के माध्यम से नवोन्मेषी रूप से साहित्य के विभिन्न विषयों को भी उजागर करके मंच के माध्यम से कला क्षेत्र में सराहना अर्जित की है। उन्हें देश-विदेश में विभिन्न सम्मान व पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। आप भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद् की सूचीबद्ध कलाकार हैं। उनके साथ संगत पर तबला पर गायन में बृजेन्द्र श्रीवास्तव, तबला पर पं रविनाथ मिश्र, सारंगी पर मनीष मिश्र व पढ़ंत पर एकता मिश्रा ने प्रभावी संगत कर आनंदित किया। सुरभि सिंह के साथ कथक नृत्यांगनाएं ईशा-मीशा रतन, अंकिता मिश्रा एवं आकांक्षा पांडेय ने नृत्य कर चार चांद लगाए। प्रभावी प्रकाश वयवस्था की जिम्मेदारी बंटी ने व उद्घोषणा में ऐश्वर्या शुक्ला ने अहम भूमिका निभाई।





