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सर्वार्थ सिद्धि योग में शरद पूर्णिमा आज, होगी चांद से अमृत वर्षा

लखनऊ। अश्विन मास का आखिरी दिन है शरद पूर्णिमा। दशहरा के बाद यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णुऔर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु धरती पर भ्रमण के लिए आते हैं। इस दिन के बाद से कार्तिक मास लग जाता है, जिसमें दिवाली, धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर को है। ग्रह नक्षत्रों की बात करें तो इस साल 6 अक्टूबर को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन मिल रहा है, दो इस पर्व को दोगुना शुभ बना रहा है। कुछ लोग इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विधान है। इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 02 मिनट से होगी और यह अगले दिन 07 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। लेकिन पूर्णिमा की शाम 6 अक्टूबर को मिलेगी, इसलिए पर्व 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। वहीं उदया तिथि में शरद पूर्णिमा 7 अक्टूबर को है।

चंद्रमा का है खास महत्व
ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा से अमृत बरसता है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसलिए इस दिन चांद की रौशनी में खीर बनाकर रखी जाती है। रात भर खीर को रखकर अगले दिन खाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है , इसलिए चांद की रोशनी में खीर बनाकर रखी जाती है।

चंद्रमा की किरणों से बरसेगा अमृत:
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। चंद्रमा से अमृत रूपी किरण बरसने की मान्यता होने से खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। जब चंद्रमा की किरणें खीर में समाहित हो जाती हैं, इसके पश्चात उस खीर का सेवन किया जाता है। खीर के साथ आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से बीमारी में लाभ होता है।

शरद पूर्णिमा की खीर को खाने के फायदे:
शरद पूर्णिमा की रात को चांदनी में रखी खीर खाने के कई फायदे बताए जाते हैं। यह खीर कई रोगों से मुक्ति दिला सकती है, खासकर चर्म रोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसके अलावा, यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मददगार मानी जाती है। मान्यता है कि यह खीर वाणी के दोषों को दूर करने के साथ-साथ मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी दिलाती है। प्रसाद के रूप में यह खीर खाने से आपको कभी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और मां लक्ष्मी का हाथ आपके सिर पर बना रहेगा।

शरद पूर्णिमा क्यों मानी गई है सर्वश्रेष्ठ :
आरोग्य, धन, सुख प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा सबसे खास है। शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी का धरती पर आगमन होने से भक्तों के धन-धान्य से भरपूर रहने का आशीर्वाद मिलता है, वहीं इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, जो स्वास्थ के लिए औषधि का काम करती है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखी जाती है और फिर इसका सेवन किया जाता है। कहेत हैं ये खीर अमृत के समान हो जाती है। मानसिक शांति के लिए भी इस दिन चंद्रमा की पूजा अचूक मानी गई हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास रचाया था, जिसे देखने के लिए मनुष्य क्या देवी.देवता भी विवश हो गए थे।

शरद पूर्णिमा का महत्व:
पौराणिक मान्यताओं अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन ही मां लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं। अपने भक्तों पर धन की देवी कृपा बरसाती हैं। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की चांदनी से पूरी धरती सराबोर रहती है और अमृत की बरसात होती है। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर ऐसी परंपरा बनाई गई है कि रात को चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने से उसमें अमृत समा जाता है।

शरद पूर्णिमा की पूजा-विधि:
शरद पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो घर में पानी में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं और इस स्थान को गंगाजल से पवित्र कर लें। इस चौकी पर अब मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें और लाल चुनरी पहनाएं। इसके साथ ही धूप, दीप, नैवेद्य और सुपारी आदि अर्पित करें। मां लक्ष्मी की पूजा करते हुए ध्यान करते हुए लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। शाम को भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी पौधा के पास घी का दीपक जलाएं। इसके साथ ही, चंद्रमा को अर्घ्य दें। चावल और गाय के दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखें। कुछ घंटों के लिए खीर रखने के बाद उसका भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में पूरे परिवार को खिलाएं। पं. पुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि नारद पुराण के अनुसार ऐसा माना गया है कि इस दिन लक्ष्मी मां अपने हाथों में वर और अभय लिए घूमती हैं। इस दिन मां लक्ष्मी अपने जागते हुए भक्तों को धन और वैभव का आशीष देती हैं। शाम होने पर सोने, चांदी या मिट्टी के दीपक से आरती की जाती है। रातभर महालक्ष्मी का ध्यान और पूजा-अर्चना करने वाले भक्त को लक्ष्मी जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

दीयों की रोशनी से जगमग होगा गोमती घाट
शरद पूर्णिमा पर आज रात में आसमान से अमृत की वर्षा होगी। इसी के चलते घरोें की छत पर लोग गाय के दूध से बनी खीर खुले आसमान के नीचे रखेंगे। शरद पूर्णिमा पर आदि गंगा गोमती का मनकामेश्वर उपवन घाट दीपकों की रोशनी से नहा उठेगा। मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने बताया कि शरद पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में खास होती है। वैसे तो हर पूर्णिमा पर आदि गंंगा गोमती की आरती होती है, लेकिन शरद पूर्णिमा पर आसमान से अमृत वर्षा के चलते खीर का वितरण किया जाता है। चंद्रमा से अमृत वर्षा होती है जो शरद ऋतु के आने और मानव को रोगों से सुरक्षित रखती है।

सनातन महासभा की ओर से गोमती आरती
लखनऊ। सनातन महासभा द्वारा इस बार अश्विन शरद पूर्णिमा 06 अक्टूबर सोमवार को सायं 6:00 बजे झूलेलाल वाटिका गोमती तट पर मनाई जाएगी। अध्यक्ष डा प्रवीण ने बताया कि इस मौके पर 143वी आदि गंगा मां गोमती महाआरती, सनातन समागम एवं विशेष श्रीमती करवाचौथ एवं समूह नृत्य प्रतियोगिता, सांस्कृतिक संध्या, नशा मुक्त प्रदेश विषयक नुक्कड़ नाटक का आयोजन होगा।

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