समूह चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन
लखनऊ। सिनेप्स इंटरनेशनल आर्ट गैलरी के सहयोग से देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित समकालीन कलाकारों की एक समूह चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया। प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में वडोदरा, गुजरात से अरुणांशु चौधरी एवं अमरनाथ शर्मा, ओडिशा से सम्बित पांडा, दिल्ली से उमा शंकर पाठक तथा लखनऊ से राहुल राय और उर्मेंद्र प्रताप सिंह शामिल हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं ई-कैटलॉग के विमोचन के साथ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री (जल शक्ति), उत्तर प्रदेश सरकार तथा विशिष्ट अतिथि डीन, ललित कला एवं परफॉर्मिंग आर्ट्स संकाय, द्वारा संपन्न हुआ। प्रदर्शनी का शुभारंभ सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को सायं 4:30 बजे हुआ और यह 5 जनवरी 2025 तक प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। सिनैप्स इंटरनेशनल आर्ट गैलरी के संस्थापक एवं निदेशक राकेश कुमार मौर्य ने मीडिया को संबोधित करते हुए प्रदर्शनी की संकल्पना और दृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला। द थाउजेंड माइल्स इन वन ब्रशस्ट्रोक शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी में 30 से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो छह समकालीन कलाकारों की व्यक्तिगत कलात्मक यात्राओं और रचनात्मक दर्शन को प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक कलाकार की कृतियाँ अपनी विशिष्ट दृश्य भाषा के साथ सामने आती हैं, जबकि सामूहिक रूप से ये रचनाएँ पर्यावरण, शहरीकरण, परंपरा, प्रवासन, स्मृति और मानव अस्तित्व जैसे विषयों से संवाद करती हैं।
अरुणांशु चौधरी ने अपनी रचनात्मक यात्रा की शुरूआत अपनी दादी के साथ आटे की मूर्तियों बनाकर की। उनकी माता, जो स्वयं एक कलाकार एवं शिक्षिका हैं, से प्रेरित होकर उन्होंने बचपन की चित्रकला से लेकर बडौदा में औपचारिक ललित कला शिक्षा तक का सफर तय किया। उनका कला विकास जलरंगों से होते हुए सशक्त ब्रशवर्क और अब बड़े आकार के मिश्रित माध्यम (मिक्स्ड मीडिया) कार्यों तक पहुँचा है। उनकी कला उनके शहर के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन को प्रतिबिंबित करती है। अमरनाथ शर्मा, जो एक छोटे से गाँव के बढ़ई परिवार से आते हैं, ने अपने दादा के माध्यम से लकड़ी से गहरा आत्मीय संबंध विकसित किया। उनके लिए लकड़ी जीवित है-हिंदू परंपरा, सततता और मानव कल्याण से गहराई से जुड़ी हुई। उनकी कृतियों कटी हुई लकड़ी के प्राकृतिक पैटर्न को जीवन, अस्तित्व और मनुष्य-प्रकृति के अटूट संबंध के रूपक के रूप में प्रस्तुत करती हैं। सम्बित पांडा का कार्य पर्यावरणीय मूल्यों, परंपराओं और पारिस्थितिक संतुलन पर केंद्रित है। तीव्र शहरीकरण और उसके जीव जगत पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति उनकी कला एक सशक्त प्रतिक्रिया है। उनकी चर्चित श्रृंखला फ्लाइज में मानव उपस्थिति को पूरी तरह हटा दिया गया है, जो सह-अस्तित्व, पारिस्थितिकी तंत्र और संतुलन की पूर्वी दार्शनिक अवधारणाओं पर एक प्रभावशाली संवाद रचती है। उमा शंकर पाठक शहरी और ग्रामीण दृश्यों को साथ रखकर एक किसान परिवेश से शहर की आकांक्षाओं तक की अपनी प्रवासी यात्रा को अभिव्यक्त करते हैं। ‘एक्सपेक्टिंग द एक्सपेक्टेशन और द ब्लैकस्ट एयर जैसी कृतियों बचपन की स्मृतियों और समकालीन चिंताओं से प्रेरित हैं, जो प्रगति, प्रदूषण और अनियंत्रित विकास की कीमत पर सवाल उठाती हैं।





