28 गोल्ड मेडल व 110 डिग्री प्रदान की जाएंगी
लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह 18 दिसंबर को आयोजित होगा। सम विश्वविद्यालय से पूर्ण विश्वविद्यालय के दर्जा प्राप्त होने के बाद विश्वविद्यालय अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित कर रहा है। इस दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पद्मश्री शोवना नारायण मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। यह जानकारी विश्वविद्यालय की कुल सचिव सृष्टि धवन ने दी। कुलसचिव सृष्टि धवन ने बताया कि इस बार दीक्षांत समारोह में मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एमपीए और बैचलर आफ परफॉर्मिंग आर्ट्स बीपीए के कुल 110 छात्राओं को डिग्री प्रदान की जाएगी। दीक्षांत समारोह में 28 स्वर्ण पदक, नौ रजत पदक और आठ कांच पदक दिए जाएंगे। इस बार सबसे अधिक 56 प्रतिशत मेडल छात्राओं और 44 प्रतिशत मेडल छात्रों को मिल रहे हैं। इस बार 14-14 गोल्ड मेडल छात्र-छात्राओं को, पांच रजत पदक छात्राओं को दिया जाएगा। 6 कांस्य पदक छात्राओं को और 2 कांस्य पदक छात्रों को प्रदान किए जाएंगे। बैचलर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स बीपीए में कुल 52 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की जा रही है, जिसमें 24 छात्राएं और 28 छात्र शामिल हैं। मास्टर आफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एमपीए कुल 55 छात्र.छात्राओं को डिग्री प्रदान की जा रही है, जिसमें 38 छात्राएं और 17 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा दीक्षांत समारोह में तीन छात्रों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाएगी।
भातखंडे की जयंती
कुल सचिव सृष्टि धवन ने बताया कि दीक्षांत समारोह के साथ ही भातखंडे की जयंती भी मनाई जाएगी। इसके अलावा दीक्षांत के अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 14, 15 व 16 दिसंबर को तीन दिवसीय दीक्षा उत्सव कार्यक्रम होगा, जिसमें पारंपरिक खेल, चित्रकला और रंगोली, काव्य लेखन एवं निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिताएं, देशभक्ति गीत एवं पूर्व छात्र सम्मेलन का आयोजन होगा।
कनक कुलश्रेष्ठ को मिलेंगे सबसे अधिक 8 मेडल
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने मेडल पाने वाले छात्र.छात्राओं की जारी सूची में मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स कथक की छात्रा कनक कुलश्रेष्ठ को सबसे अधिक 8 मेडल प्रदान किए जाएंगे। इसके बाद मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स गायन के सोनम शुक्ला को चार मेडल, बैचलर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स गायन के पवन कुमार को चार मेडल दिए जाएंगे। मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स सितार सुरजीत सिंह को तीन, बैचलर परफॉर्मिंग आर्ट्स तबला मोहित कुमार सिंह को तीन मेडल और मास्टर का परफॉर्मिंग आर्ट्स भरतनाट्यम मल्लिका नवीन गुप्ता को तीन मेडल दिए जाएंगे। मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स गायन की सृष्टि अवस्थी को दो, बैचलर परफॉर्मिंग आर्ट्स गायन के नरेंद्र कुमार वर्मा, विदुषी मिश्रा को दो, बैचलर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स वायलिन तरुण कुमार पाल को दो, मास्टर आॅफ परफॉर्मिंग आर्ट्स तबला रमनदीप सिंह को दो मेडल दिए जाएंगे। 10 छात्रों को एक-एक मेडल प्रदान किया जाएगा।
कला की फील्ड में परिवार में अकेली हूं : कनक
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के 13 दीक्षांत समारोह में आठ गोल्ड मेडल के साथ विश्वविद्यालय की टॉपर बनी कनक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि वह कल और आर्ट्स के फील्ड में अपने परिवार की पहली सदस्य है जो इस क्षेत्र में अपना कैरियर बना रही है। कनक मूलरूप से कानपुर के पनकी क्षेत्र की रहने वाली है। पिता सतीश चन्द्र कुलश्रेष्ठ व्यवसायी हैं। भाई आईटी सेक्टर में हैं। परिवार व रिश्तेदार के लोग फोर्स में हैं या तो इंजीनियरिंग के फील्ड में है, वही सिर्फ अकेली हैं जो पांच साल की उम्र से कथक सीख रही हैं। कनक ने बताया कि मेरी मां अक्सर कहती थीं कि सिर्फ सीखती रहोगी या कुछ नाम भी करोगी। आज अब जब 8 गोल्ड मेडल मिले तो लगा कि मां अर्चना कुलश्रेष्ठ की मेहनत सफल हो गई।
संघर्ष और साधना साथ-साथ : सोनल
दीक्षांत समारोह में तीन गोल्ड और एक सिल्वर के साथ कुल चार मेडल हासिल करने वाली एमपीए गायन छात्रा सोनल शुक्ला ने बताया कि संघर्ष और कला साधना एक साथ करती आ रही है। पिता एक प्राइवेट कम्पनी में काम करते हैं। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत न होने के बावजूद पिता ने हमेशा से उनका साथ दिया। पढ़ाई आगे जारी रखने की वजह से मैंने अपनी शादी नहीं की, लेकिन छोटी बहन की शादी कराने में पिता का हाथ बंटाया। दयानन्द इंटर कॉलेज में म्यूजिक पढ़ाने के साथ अपनी संगीत शिक्षा जारी रखी है और भविष्य में पीएचडी करने का इरादा है।
60 किलोमीटर चलकर सीखा संगीत : सृष्टि अवस्थी
एमपीए गायन की छात्रा सृष्टि अवस्थी ने उन्नाव से लखनऊ रोज अपडाउन करके अपने संगीत को जीवित रखा। उन्नाव में कोई अच्छा सिखाने वाला नहीं था तो दोस्तों से भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के बारे में पता चला तो लखनऊ आकर यहां एडमिशन ले लिया। जब से यहां एडमिशन लिया है तब से रोज लखनऊ से उन्नाव आना.जाना होता है। यहां शिक्षकों के सहयोग से संगीत सीखने में काफी मदद मिली।





