चार दिवसीय नाट्य समारोह शुभ आरंभ का आगाज
लखनऊ। भारतेन्दु नाट्य अकादमी का रंगमण्डल 20 साल के बाद दोबारा सक्रिय हो गया है। बीएनए रंगमण्डल की ओर से रविवार से चार दिवसीय नाट्य समारोह शुभ आरंभ का आगाज हुआ। थ्रस्ट सभागार में नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा सिक्किम की प्रस्तुति भास.भारतम के मंचन से समारोह पहले ही दिन यादगार बन गया। वरिष्ठ रंगकर्मी पीयाल भट्टाचार्य का सटीक निर्देशन और कलाकारों के सधे हुए अभिनय ने एक घंटा 20 मिनट तक दर्शकों को बांधे रखा।
महाकवि भास की रचना भास.भारतम की चरण और भट्ट के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया। चरण और भट्ट कहानी कहने के सबसे पुराने माध्यमों में से एक है जो आज भी भारत के कई हिस्सों में देखा जाता है। नाटक की शुरूआत पंचरात्रम से होती है। जिसमें अज्ञातवास में रह रहे पांडवों को पांच रातों में ढूंढने के लिए शर्त रखी जाती है कि अगर पांच रातों में गुरु द्रोण पांडवों को ढूंढ लेते हैं, तो दुर्याधन पांडवों को अपना आधा राज्य गुरुदक्षिणा में दे देगा। जब ऐसा होता है, तो भट्टा द्वारा भासा के काम पर सवाल उठाया जाता है। चरण इस संघर्ष पर चर्चा करते हैं। इसके बाद दूतवाक्याम नाटक है। जिसमें श्रीकृष्ण युद्ध से पहले दूत बनकर शांतिपूर्ण प्रस्ताव रखते हैंए लेकिन दुर्याधन अपने अहंकार और सटीक कारणों के चलते इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है और दुर्याधन के इस अभिमानपूर्ण प्रयास पर श्रीकृष्ण अपना विकराल रूप दिखाते हैं। वह एक कैदी है। इसके बाद कर्णभारम् नाटक शुरू होता है। जिसमें कर्ण युद्ध से पहले इंद्र के छल के कारण अपने कवच.कुंडल खो देता है और बिना कवच के युद्ध में उतर जाता है। यहीं पर अभिमन्यु युद्ध का प्रसंग भी आता है। अंत में नाटक उरुभंगम आता है। जिसमें युद्ध में कृष्ण के आदेश पर भीम द्वारा दुर्याधन के उरुभंग का दृश्य है। जिसके बाद दुर्याधन को आत्मबोध होता है और उसका स्वगार्रोहण होता है। मंच पर तिला रूपा सपोक्ता, सुकन्या दत्ता गुप्ता, चन्द्रिका क्षेत्री, उत्तम गुरुंग, श्यामा मन्ना, कशोब दास, भुवन शर्मा, आदर्श प्रधान, बीरबल सुब्बा, तुषार निराला समेत अन्य ने प्रभावी अभिनय किया।





