आधे लापता लोगों का नहीं मिल पाता कोई सुराग
गायब होने वालों में लड़कियों की संख्या अधिक
एनसीआरबी के आंकड़ों में हुआ चौकाने वाला खुलासा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हर दिन 18 साल से कम उम्र के लगभग 17 लड़के और लड़कियां गायब हो रही है। अगर इस संख्या को घंटों में देखा जाये तो हर दो घंटे में एक से ज्यादा। यह खुलासा हुआ है नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो दवारा हाल ही में जारी की गयी रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया-2019’ में। इस रिपोर्ट में दिये गये आंकड़े बेहद चौकाने वाले हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2019 के दौरान प्रदेश में कुल 6,089 लड़के और लड़कियां गायब हुए। इनमे 2,597 लड़के थे, जबकि लड़कियों की संख्या 3,492 थी। इसमें 2,905 लड़के और लड़कियां ऐसे थे जो 2019 के पहले गायब हुए थे और उनको ट्रेस नहीं किया जा सकता था। इनमे भी 1,314 लड़के और 1,591 लड़कियां शामिल थे। लेकिन यह आंकड़े केवल वह है जिनकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गयी, असल संख्या इससे कही ऊपर भी हो सकती है।
गायब हुए नाबालिगों के मामले में उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के बाद चौथे स्थान पर है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल गायब होने वाले व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है। गायब हुए व्यक्तियों के मामलों में 2018 की तुलना में 2019 में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि गायब हुए नाबालिगों के मामले में यह वृद्धि 8.9 फीसद है।
अगर, गायब हुए व्यक्तियों की बात करें तो 2019 से पहले 14,775 ऐसे लोग थे, जिनकी तलाश नहीं की जा सकी या उनका किसी भी तरह का कोई सुराग नहीं मिला। गायब हुए लोगों में 8,126 पुरुष और 6649 महिलाएं शामिल थी। साल 2019 में गायब होने वालों की संख्या में थोड़ी से कमी तो आयी, लेकिन यह संख्या भी कुल 10,808 रही। इसलिए साल के अंत तक यह संख्या बढ़ कर 25,583 हो गयी। इनमे 13106 पुरुष थे, जबकि 12477 महिलाएं शामिल थी।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 के अंत तक 12,374 लोगों को या तो ट्रेस कर लिया गया या उनका सुराग यानि वह कहा हैं इसका पता लगा लिया गया। बरामद या ट्रेस किये गये लोगों में 6192 पुरुष और 6182 महिलाएं शामिल थी। इसमें चौकाने वाला तथ्य यह है कि इनमे से आधे से ज्यादा लोग ऐसे थे जिनका कोई पता नहीं लग पाया।
पुरुषों का रिकवरी प्रतिशत 47.2 था, जबकि महिलाओं का 47.2 फीसद रहा। पुरुष और महिला मिला कर सिर्फ 48.4 प्रतिशत का ही पता लगाया जा सका, जिसकी वजह से साल के अंत तक 13,209 लोग ऐसे बचे थे, जिनका कोई सुराग या पता नहीं लग सका। इनमे 6914 पुरुष थे, जबकि 6295 महिलाएं थीं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार 2019 के अंत तक 2,70,443 पुरुष गायब थे, जिसमे से सिर्फ 125558 यानि 46.4 प्रतिशत का पता लगाया जा सका। लेकिन, एक बड़ी संख्या में 1,44,885 पुरुषों का तमाम कोशिशों के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला और वे गायब होने वाली सूची में शामिल रहे।
इसमें भी अगर आयु वर्ग और लिंग की बात करें तो 5 साल से 18 साल के आयु वर्ग के बच्चों व पुरुषों में 2019 और उसके पहले के सालों को मिला कर 36,972 लोग गायब हुए। यहां भी स्थिति थोड़ी बेहतर है। इस आयु वर्ग के गायब लोगों में 21,797 यानि 59.0 फीसद को खोज निकला गया, जबकि 15,175 का कोई सुराग नहीं मिला।
एडल्ट मेल यानि 19 साल से 60 साल के बीच की उम्र वाले पुरुषों की संख्या भी कम नहीं है। 2019 या उसके पहले से सालों के आंकड़े मिला कर इस आयु वर्ग के 2,10,369 की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज की गयी। लेकिन, इनमे से आधे से भी कम मात्र 94765 मतलब 45 प्रतिशत लोगों का पुलिस सुराग ढूंढ सकी और 115604 लापता के लापता ही रह गये।
सीनियर सिटिजन मतलब 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लापता बुजुर्गों की संख्या भी कम नहीं है। इस आयु वर्ग के 23,102 लोग गायब हुए, जिनमे से सिर्फ 8996 यानि 38.9 प्रतिशत ही तलाशे जा सके। बाकी के 14,106 का कोई नामो-निशान पुलिस नहीं ढूंढ सकी।
महिलाओं के गायब होने होने के आंकड़े तो और चौकाने वाले हैं। 2019 के दिसंबर या उससे पहले से सालों को मिला कर बच्चियों सहित कुल 4,22,439 महिलाओं के गायब होने की शिकायतें दर्ज कराई गयी। इनमे से 2,22,949 यानि 52.8 प्रतिशत की या तो बरामदगी हुई या उनका पता लगा लिया गया।
बाकि की 1,99,490 बच्चियों और महिलाओं का बकौल एनसीआरबी कोई पता ठिकाना नहीं मिल सका। 5 साल से 18 वर्ष से कम के आयु वर्ग की लड़कियों व नवयुवतियों के मामले में तो आंकड़े लड़कों या नवयुवकों की तुलना में लगभग दुगने हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2019 के अंत तक इस आयु वर्ग की 82,619 गायब हुईं थी। इनमे से 49,436 यानि 59.8 का पता चल गया, लेकिन 33183 का कोई पता ठिकाना नहीं मिल पाया। 19 साल से 60 वर्ष के बीच की महिलाओं के मामलों में 2019 और उसके पहले के सालों 329504 लापता हुईं थी।
इनमें से 1,68,793 का पुलिस ने सुराग ढूंढ निकला। लेकिन साल खत्म होने तक इस आयु वर्ग की 1,60,711 महिलाएं गायब ही रहीं। इस दौरान 60 साल या उससे ज्यादा उम्र की 10,316 महिलाएं गायब हुईं। इनमे से 4720 मतलब 45.8 को पुलिस ने खोज लिया, लेकिन 5,596 का कोई पता ठिकाना नहीं मिल सका।





