स्टॉकहोम, 14 अक्टूबर (भाषा) भारतीय-अमेरिकी अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर को संयुक्त रूप से 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की सोमवार को घोषणा की गई। नोबेल समिति ने सोमवार को जारी बयान में तीनों को वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों के लिए 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की।
नोबेल पुरस्कार के तहत 90 लाख क्रोनर (स्वीडन की मुद्रा) यानी 9,18,000 डॉलर का नकद पुरस्कार, एक स्वर्ण पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। इस राशि को विजेताओं के बीच बराबर बांटा जाता है। बनर्जी और उनकी फ्रांसीसी-अमेरिकी पत्नी डुफ्लो अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में काम करते हैं। जबकि क्रेमर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। अपनी प्रतिक्रिया में 58 वर्षीय बनर्जी ने कहा कि पुरस्कार के लिए चुना जाना काफी सुखद अनुभव है। उन्होंने कहा, आपको अपने जीवन में इतना सौभाग्यशाली मौका बहुत कम मिलता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की पूर्व सलाहकार डुफ्लो अर्थशास्त्र का नोबल पाने वाली दूसरी महिला हैं। वहीं वह यह पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की अर्थशास्त्री भी है।
मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एमआईटी) की खबर में डुफ्लो के हवाले से कहा गया है, हम अविश्वसनीय रूप से खुश और आभारी हैं। हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि इस तरह के काम को पहचान मिल रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य प्रमुख नेताओं ने बनर्जी को इस सम्मान के लिए बधाई दी है। कोविंद ने कहा, दुनिया और भारत में गरीबी से कैसे लड़ा जाए, इस काम में उनके (बनर्जी) शोध ने अर्थशास्त्रियों की मदद की है।





