जोड़ो में दर्द व सूजन को न करें नजरअंदाज
विश्व आर्थराइटिस दिवस आज
वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। शारीरिक श्रम की कमी और अनियमित दिनचर्या से युवाओं के घुटने कम उम्र में ही जवाब देने लगे हैं। बुजुर्गो में होने वाली जोड़ों की बीमारी अर्थराइटिस (गठिया) अब युवा वर्ग को भी चपेट में लेने लगी है।
विश्व अर्थराइटिस दिवस से पूर्व इसके प्रति जागरूक करते हुए डा. लोकबंधु अस्पताल के आथोपेडिक सर्जन डा. जीपी गुप्ता ने बताया कि अगर जोड़ों में काफी समय दर्द व सूजन है तो उसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं हैं। यह आर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले 100 मरीजों में 30 फीसद से ज्यादा तादाद 50 से कम उम्र की है। दिन ब दिन यह केस बढ़ते ही जा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह कम चलना-फिरना है।
उनका कहना है कि मोबाइल पर बैठकर घंटों चैटिंग करने की लत इस कदर बढ़ गयी है कि लोग एक ही जगह बैठे रहते हैं, जिसकी वजह से उन्हें अर्थराइटिस की समस्या बढ़ रही है। इसमें भी सबसे कॉमन आस्टियो अर्थराइटिस है, जो युवा वर्ग के लोगों को भी शिकार बनाने लग गया है। इसमें सबसे ज्यादा घुटने का दर्द परेशानी बढ़ा रहा है।
डा. गुप्ता का कहना है कि बीमारी के जल्द पता लगने से इसे न सिर्फ बढ़ने से रोका जा सकता है बल्कि इससे दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आर्थराइटिस होने का मतलब यह नहीं है कि आप सामान्य जीवन व्यतीत नहीं कर सकते। उपचार माध्यमों में समय के साथ तरक्की भी हुई है, जिसका सीधा फायदा इसके मरीजों को मिलता है। डा. गुप्ता का कहना है कि संतुलित भोजन पर्याप्त है।
इसमें सभी पोषक तत्व पाये जाते हैं जो शरीर से लिए जरूरी है। ऐसे में आनवश्यक मल्टी विटामिन, कैल्शियम या अन्य सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए। कई बार यह शरीर को फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में हरी सब्जियां लें। कैल्शियम की पूर्ति के लिए पनीर व दूध खानपान में शामिल करें। वह कहते हैं कि सप्लीमेंट की जरूरत उन्हें होती है जो बुजुर्ग हों और पर्याप्त मात्रा में भोजन न खा पाते हों।
इन लक्षणों पर दें ध्यान
- जोड़ों में दर्द
- अकड़न
- घुटनों में दर्द और सूजन
- चलने फिरने में तकलीफ
- जोड़ों में आवाज आना





