– सुंदकांड के माध्यम से सुंदर समाज की कामना की गई
लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल ने शनिवार 26 सितम्बर को लखनऊ वापस लौटकर संवाददाताओं को बताया कि उनकी अगुवाई में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में शुक्रवार 25 सितम्बर 2026 को 15वां सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया गया। इस विशिष्ट आध्यात्मिक आयोजन के लिए लखनऊ से तीन सौ महिलाएं, बसों से अयोध्या पहुंची। 25 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन अनंत चतुर्दशी। यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है और बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस अवसर पर श्रीराम मंदिर परिसर में सुंदरकांड के माध्यम से विश्व शान्ति एवं भारत उन्नति की कामना की गई। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड के नियमित पाठ से सुंदर समाज का सपना साकार होगा। श्री राम मंदिर परिसर में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, ट्रस्ट के माध्यम से समस्त व्यवस्थाएं की गई थीं। सपना गोयल ने बताया कि उनका एक मात्र लक्ष्य है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि, भारत एक बार पुन: विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो। भारत उत्थान के इस महा उद्देश्य की पूर्ति के लिए ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ के साथ प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को नजदीकी मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन, करवाया जा रहा है। वर्तमान में सुंदरकांड महा अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है। बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के उपलक्ष्य में सपना गोयल की अगुआई में पांच हजार से अधिक महिलाओं ने लखनऊ के झूलेलाल घाट पर सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान किया था। इस क्रम में महा तीर्थाटन अभियान के अंतर्गत नैमिषारण्य, उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, चित्रकूट के पावन तीर्थ परिसर रामघाट, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर, कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर ही नहीं भगवान कृष्ण जन्मस्थली मंदिर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। 11 सितम्बर 2024 से अयोध्या तीर्थ में प्रभु राम जी के जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके साथ ही सेवा परमो धर्म: एवं स्वदेशी अपनाने का संदेश भी दिया जा रहा है।




