लखनऊ। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह वह अवधि होती है जब लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। हर साल पितृ पक्ष की शुरूआत भाद्रपद पूर्णिमा से होती है और इसका समापन आश्विन अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। इस दौरान अलग-अलग तिथियों पर दिवंगत परिजनों का श्राद्ध किया जाता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन विशेष माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के दिन पितृपक्ष का आरंभ होगा। इसका समापन 10 अक्तूबर को आश्विन अमावस्या को पितृपक्ष का समापन हो जाएगा।
पितृ पक्ष 2026 की तिथियां
पितृ पक्ष के दौरान हर तिथि का अपना अलग महत्व होता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु जिस तिथि को हुई होती है, सामान्यत: उसी तिथि पर उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। 2026 में पितृ पक्ष की तिथियां इस प्रकार रहेंगी:
26 सितंबर, शनिवार, पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार, प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार, द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार , तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार , चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार , पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार , षष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार , सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर, रविवार , नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर, सोमवार , दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार , एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार , द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार , त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार , चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार , सर्वपितृ अमावस्या
3 अक्तूबर को सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध
पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 3 अक्तूबर को सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो अगले दिन 4 अक्तूबर को सुबह 5:51 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से 3 अक्तूबर को सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियों का श्राद्ध माना जाएगा। इसके बाद 4 अक्तूबर को नवमी श्राद्ध किया जाएगा। वहीं पितृ पक्ष का अंतिम दिन 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी। यह दिन उन पितरों के लिए विशेष माना जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारण से संबंधित तिथि पर नहीं हो पाया हो।
श्राद्ध पक्ष में तिथि के अनुसार श्राद्ध के नियम
जिस तिथि को परिजन का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई है, तो पितृ पक्ष में पंचमी के दिन उनका श्राद्ध करना चाहिए। अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और पिंडदान किया जा सकता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितरों की कृपा से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहने की मान्यता है। श्राद्ध कर्म के दौरान दान-पुण्य और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
पितृ पक्ष में इन 7 चीजों का जरूर करें दान
धर्म ग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पितृ लोक से पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी पर अपने वंशजों के पास आते हैं। इस दौरान उनके नाम से किया गया दान सीधे उन तक पहुंचता है, जिससे उनकी आत्मा को मोक्ष मिलता है। जानें पितृ पक्ष में किन चीजों का दान करना चाहिए।
अन्न दान:
पितृ पक्ष में गेहूं, चावल, जौ, तिल और राशन सामग्री (सीधा) का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अन्न दान को सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
काले तिल का दान:
काले तिल का दान अत्यंत शुभ माना गया है। श्राद्ध और तर्पण में काले तिल का उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न हुए हैं। मान्यता है कि इनका दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
गौ दान:
शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में गाय का दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और धन-संपदा में वृद्धि होती है।
वस्त्र दान:
पितृ पक्ष में किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को वस्त्र दान करना अति उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति को मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है। वस्त्र दान से पितृ तृप्त होते हैं।
घी का दान:
पितृ पक्ष में शुद्ध देसी घी या गुड़ का दान करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। इससे परिवार की कलह दूर होती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
चांदी या स्वर्ण दान:
चांदी का संबंध चंद्रमा से है। मान्यता है कि इसका दान करने से पितरों को शांति मिलती है और वंश वृद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नमक का दान:
पितृ पक्ष में नमक का दान करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।




