सोलन। कभी चीड़ के पेड़ों से आती खुशबू, साफ हवा और शांत वादियों के लिए मशहूर कसौली अब बेतरतीब पर्यटन विस्तार की मार झेल रहा है। बढ़ते होटल, होमस्टे और अन्य पर्यटन इकाइयों के कारण पहाड़ी क्षेत्र में कंक्रीट का दबाव बढ़ गया है। पर्यावरणीय क्षरण, धूल और प्रदूषण ने कसौली की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन कारोबार दोनों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
कसौली प्लानिंग एरिया करीब 1,911.39 हेक्टेयर में फैला है और इसमें 35 गांव शामिल हैं। क्षेत्र में पर्यटन इकाइयों का तेजी से विस्तार हुआ है। किम्मूघाट-गड़खल, सनावर-कसौली, धर्मपुर-कसौली, गड़खल-छब्बल-जगजीतनगर और धर्मपुर-कंडा मार्गों के अलावा कसौली गांव, डोची, नंदोह और गारा जैसे ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में होटल और अन्य ठहरने की सुविधाएं विकसित हो गई हैं। अनुमानों के मुताबिक कसौली और आसपास के क्षेत्र में करीब 250 होटल संचालित हो रहे हैं। लगभग इतनी ही संख्या में बेड एंड ब्रेकफास्ट और होमस्टे इकाइयां भी मौजूद हैं।
होटल बढ़े, लेकिन कमाई में गिरावट
कसौली का होटल कारोबार कभी हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन बाजारों में गिना जाता था, लेकिन अब बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर औसत कमरे की कमाई पर पड़ रहा है। कुछ साल पहले जहां एक कमरे से औसतन 7,000 से 8,000 रुपये प्रति रात तक राजस्व मिलता था, उसमें करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है।
होटल कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार ज्यादातर होटल सालाना औसतन केवल 35 फीसदी ऑक्यूपेंसी पर चल रहे हैं। बड़े होटल भी करीब 60 फीसदी तक ही पहुंच पाते हैं।कसौली में मुख्य पर्यटन सीजन करीब 120 दिनों का माना जाता है। ऐसे में सालभर के कर्मचारियों, रखरखाव, बिजली, पानी और अन्य खर्चों को पूरा करना होटल संचालकों के लिए मुश्किल हो रहा है। स्थानीय आकर्षण सीमित होने के कारण कई पर्यटक एक-दो दिन से ज्यादा यहां नहीं रुकते।
इसका असर नए और पुराने दोनों प्रोजेक्ट पर पड़ा है। कंडा-धर्मपुर और किम्मूघाट-चक्की मोड़ मार्गों पर निर्माणाधीन 80 कमरों वाले होटल समेत कई संपत्तियां पुनर्विक्रय के लिए उपलब्ध बताई जा रही हैं।एक स्थानीय होटल कारोबारी के मुताबिक,हर जगह होटल उगते दिखाई दे रहे हैं।बाजार में इतनी अधिक प्रतिस्पर्धा हो गई है कि कर्ज और अन्य खर्च चुकाने के बाद कई संचालकों के लिए कारोबार को लाभ में चलाना चुनौती बन गया है।
हर महीने होटल बढ़ने से चिंतित कारोबारी
कसौली रेजिडेंट्स एंड होटलियर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रॉकी चिमनी के अनुसार क्षेत्र में ठंडा मौसम और खूबसूरत नजारे प्रमुख आकर्षण हैं, लेकिन पर्यटकों को लंबे समय तक रोकने के लिए पर्याप्त गतिविधियां नहीं हैं। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों ने सरकार से नियमित कार्यक्रम और उत्सव आयोजित करने की मांग की है।
एसोसिएशन की सलाहकार विन्नी चड्ढा के अनुसार क्षेत्र में होटल इकाइयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उनका दावा है कि हर महीने होटलों की संख्या में करीब 20 फीसदी वृद्धि हो रही है। इससे मौजूदा पर्यटन इकाइयों के राजस्व पर असर पड़ रहा है और नागरिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में होटल पर्याप्त पार्किंग सुविधा के बिना संचालित हो रहे हैं।एसोसिएशन ने कुछ वर्षों के लिए नए पर्यटन प्रोजेक्ट की मंजूरी पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन कराने का सुझाव दिया है कि मौजूदा बुनियादी ढांचा आगे कितने व्यावसायिक पर्यटन विकास का भार उठा सकता है।
पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था भी चुनौती
होटल कारोबारी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। इसके तहत टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के भवन निर्माण नियमों में बदलाव, प्रत्येक होटल में पर्याप्त पार्किंग अनिवार्य करने और यातायात व्यवस्था में सुधार की मांग शामिल है।गड़खल जंक्शन भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। यहां पांच सड़कें आकर मिलती हैं, जिसके कारण पर्यटन सीजन में यातायात का दबाव बढ़ जाता है।
बिना पंजीकरण चल रहे होमस्टे भी बढ़े
स्थापित होटल संचालकों के सामने होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयों की बढ़ती संख्या भी चुनौती बन रही है। होटल संचालकों का कहना है कि पारंपरिक होटलों को स्पा, स्विमिंग पूल, गेमिंग जोन जैसी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जबकि छोटे होमस्टे अपेक्षाकृत कम खर्च में संचालित हो जाते हैं।ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल के जरिए संचालित बिना पंजीकरण वाली पर्यटन इकाइयों ने भी प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। ये इकाइयां अपनी जरूरत के अनुसार किराया तय कर सकती हैं, जिससे स्थापित होटलों के सामने ग्राहक बनाए रखने की चुनौती बढ़ती है।
पर्यटन विभाग ने ऐसी अवैध या बिना पंजीकरण वाली इकाइयों की पहचान के लिए अभियान शुरू किया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी पद्मा छोडोन के अनुसार सोलन और सिरमौर जिलों में करीब 100 बिना पंजीकरण वाली इकाइयों की पहचान की गई है। हालांकि, विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कार्रवाई की रफ्तार धीमी है।
पर्यटन बढ़े, लेकिन प्रकृति और कारोबार दोनों का संतुलन जरूरी
कसौली में बढ़ते पर्यटन कारोबार ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को अवसर दिए हैं, लेकिन होटल और अन्य पर्यटन इकाइयों के अनियंत्रित विस्तार से पर्यावरण, यातायात, पार्किंग और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। होटल कारोबारियों की मांग है कि नए प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले क्षेत्र की वहन क्षमता का आकलन किया जाए, ताकि कसौली के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यटन कारोबार के बीच संतुलन कायम रह सके।




