लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन हिन्दी भवन के निराला सभागार में किया गया। दीप प्रज्वलन, माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, पुष्पार्पण के उपरान्त वाणी वंदना सुश्री सरोज खुल्बे द्वारा प्रस्तुत की गयी। अतिथि डॉ. सुधाकर अदीब, लखनऊ का स्वागत उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न भेंट कर डॉ. अमिता दुबे, प्रधान सम्पादक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा किया गया। इस अवसर पर कहानी, कविता एवं निबन्ध प्रतियोगिता-2025 के पुरस्कृत रचनाकारों सुनीता कुमारी (वाराणसी), माधव शर्मा (हाथरस), श्रेया यादव (गाजीपुर), कुश रजवार (लखनऊ), योगेन्द्र पाण्डेय (देवरिया), रतनमाला भारती (अयोध्या), विवेक प्रताप मद्धेशिया (कुशीनगर), शिवांगी यादव (गाजीपुर), दानिया इदरीसी (लखनऊ), सृजन पाण्डेय (शाहजहाँपुर), यशवीर सिंह (सम्भल), सुकीर्ति वर्मा (लखनऊ) को उत्तरीय व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्माननीय अतिथि डॉ. सुधाकर अदीब, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व निदेशक उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान लखनऊ ने हिन्दी दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए विश्व पटल पर हिन्दी के बढ़ते प्रभाव की चर्चा की। डिजिटल युग में हिन्दी वैज्ञानिकता और हिन्दी भाषा की सार्थकता पर भी प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित एकांकी- पृथ्वीराज की आँखे, मालिक के मालिक की सेवा व बादल की मृत्यु का पाठ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुस्तकालय से सम्बद्ध शोधार्थी विद्यार्थी श्वेता जायसवाल, अनमोल शर्मा, सौम्या मिश्रा व डॉ. सरिता गिरि द्वारा किया गया। डॉ. अमिता दुबे, प्रधान सम्पादक, उप्र. हिन्दी संस्थान द्वारा कार्यक्रम का संचालन एवं संगोष्ठी में उपस्थित समस्त साहित्यकारों, विद्वत्तजनों एवं मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया गया।




