डीएलडब्ल्यू ने 2015-16 से 2021 तक 11 देशों में निर्यात कर चुका है 172 इंजन
रूपक सान्याल
लखनऊ। बनारस रेल इंजन कारखाने (डीएलडब्ल्यू) में तैयार हुए विदेशों में अपना झंडा गाड़ रही है। डीएलडब्ल्यू से अभी तक बांग्लादेश को मीटरगेज व ब्राडगेज के 49, श्रीलंका को ब्राडगेज के 32,मलेशिया को मीटर गेज के 01,तंजानिया को मीटर गेज के15,वियतनाम को मीटरगेज के 25, म्यांमार को कैपगेज के 29, सूडान को कैपगेज के 08, सेनेगल को मीटरगेज गेज के 04, अंगोला को कैप गेज के03,माली को मीटरगेज के 01 तथा मोजांबिक को के कैप गेज के 08 रेल इंजन का निर्यात किए जा चुके हैंं।
म्यांमार के अधिकारी हाल में बनारस रेल इंजन कारखाना का दौरा कर यहां के बने इंजन कर प्रशंसा की है। भारतीय रेलवे के लिए इंजन बनाने वाले बनारस रेल इंजन कारखाने की कुशलता ने दुनिया का ध्यान खींचा है। दुनिया के कई देशों से डीजल रेल इंजन बनाने के लगातार आर्डर मिल रहे हैं। बनारस रेल इंजन कारखाना न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि अन्य देशों की ट्रेनों के लिए भी इंजन बना रहा है।
काशी के इस कारखाने ने पिछले पांच साल में जनवरी 2021 तक कुल 172 डीजल रेल इंजन तैयार कर 11 देशों को निर्यात किए हैं। इसमें ज्यादातर अफ्रीकी देश हैं। बनारस रेल इंजन कारखाना की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि हम मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के विजन के साथ कार्य कर रहे हैं।
बनारस रेल इंजन कारखाने ने हाल में दक्षिण.पूर्वी अफ्रीका में स्थित देश मोजाम्बिक को 91.02 करोड़ रुपये के छह डीजल इंजनों को निर्यात किया है। मोजाम्बिक के लिए एक और 3000 एचपी केप गेज डीजल इंजन का निर्माण चल रहा है। मलेशिया से भी आॅर्डर मिले हैं। बनारस रेल इंजन कारखाने ने वर्ष 2018-19 और 2019-20 में श्रीलंका को 3000 एचपी के कुल 10 इंजनों का निर्यात किया।
राजेश कुमार ने बताया कि एक पुराने एचएचपी डीजल लोको को स्टैंडर्ड गेज बोगी के साथ रेट्रोफिट कर सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इससे अन्य देशों के लिए स्टैंडर्ड गेज पर नए और पुराने डीजल इंजनों के भविष्य में होने वाले निर्यात का रास्ता खुलेगा।
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