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भारत और मॉरीशस ने सभी आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने पर की चर्चा

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यहां मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ से वार्ता की और द्विपक्षीय वार्ता एवं निवेश में मजबूती लाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अंतिम रूप देने और समुद्री अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने 15वें प्रवासी भारतीय दिवस के उद्घाटन समारोह के इतर मुलाकात की।

मुख्य वक्ता के तौर पर प्रवासी भारतीय दिवस

गौरतलब है कि जगन्नाथ ने मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के तौर पर प्रवासी भारतीय दिवस के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। विदेश मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच के लंबे और आजमाए हुए रणनीतिक संबंधों के हर पहलू की समीक्षा की। बयान के मुताबिक, मोदी और जगन्नाथ के बीच समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने सहित द्विपक्षीय संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने की पहलों पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने मौजूदा द्विपक्षीय विकास सहयोग परियोजनाओं और स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्रों में साझेदारी की परियोजनाओं के नए प्रस्तावों पर भी चर्चा की। बयान के मुताबिक, इन नेताओं ने समुद्री अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और अफ्रीका में तालमेल बढ़ाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की

इससे पहले, जगन्नाथ ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत में बदलाव आया है और उन्होंने कई पहल की है जिससे कम सौभाग्यशाली लोगों को बेहतर अवसर मिल सके। उन्होंने कहा, दुनिया भारत के प्रभावशाली आर्थिक प्रदर्शन और मोदी जी आपके नेतृत्व में इस देश में आए बदलाव की सराहना करती है। आधुनिक और खुशहाल भारत के लिए आपकी आकांक्षा ने स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्मार्ट सिटी, स्टार्ट अप इंडिया, स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत और कई अन्य पहल के लिए प्रेरित किया है। जगन्नाथ ने कहा, यह न सिर्फ आधुनिक भारत की आपकी दृष्टि, मानव गरिमा और समावेशिता के लिए सम्मान के प्रति आपके लगाव को बयां करता है बल्कि इस बात को सुनिश्चित करने की आपकी इच्छा को भी दर्शाता है कि विकास का लाभ वैश्विक समुदाय समेत सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित हो।

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