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दुर्लभ संयोग में 22 से शुरू होगा सावन का महीना, पड़ेंगे 5 सोमवार

भक्त करेंगे भगवान शिव की पूजा

लखनऊ। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना इस वर्ष 22 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन महीना इस साल विशेष संयोग के साथ शुरू और खत्म हो रहा है। सावन में सोमवारी का विशेष महत्व है। इस वर्ष पांच सोमवारी पड़ रहा है। सावन माह में पांच सोमवार पड़ना बहुत शुभ माना जाता है। 21 जुलाई, रविवार को आषाढ़ पूर्णिमा के बाद सावन प्रतिपदा 22 जुलाई को सोमवार को पड़ रहा है। वहीं रक्षाबंधन त्योहार सावन पूर्णिमा 19 अगस्त को भी सोमवार दिन ही पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य पीके युग कहते हैं कि इस वर्ष प्रीति योग और सावन नक्षत्र में सावन महीना की शुरूआत हो रही है। सावन के पहले दिन 22 जुलाई को सुबह से शाम तक प्रीति योग रहेगा, वहीं सावन नक्षत्र सुबह से लेकर रात साढ़े दस बजे तक रहेगा। सावन के सोमवार को जल चढ़ाकर भोलेनाथ की पूजा और मंगला गौरी व्रत रख मां पार्वती की पूजा से भक्तों को मनोवांछित फल, पुण्य व सुख की प्राप्ति होती है। वैसे तो सावन का महीना बहुत विशेष है, लेकिन खास बात यह है कि इस वर्ष सावन की शुरूआत कई दुर्लभ संयोग में हो रही है। क्योंकि सावन का महीना सोमवार के दिन से होगा, जोकि शिवजी का प्रिय वार भी है। इसके साथ ही सावन की समाप्ति भी सोमवार के दिन ही होगी। वहीं सावन के पहले दिन दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण होगा। इन शुभ योगों में पूजा करना और व्रत रखना भक्तों के लिए बहुत फलदायी होगा।
प्रीति योग- 22 जुलाई 2024, सुबह से लेकर शाम 05:58 तक, आयुष्मान योग- 22 जुलाई 2024, प्रीति योग खत्म होते ही आयुष्मान योग लग जाएगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 22 जुलाई 2024, सुबह 05:57 से लेकर रात 10:21 तक। पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि सावन महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। आस पास स्थित शिव मंदिर में जाकर शिवजी के दर्शन करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र,धतूरा,गंगाजल और दूध अवश्य शामिल करें। सावन माह में शिवजी के जलाभिषेक के दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में अपनी सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें और उनकी आरती करते शिव चालीसा का पाठ करें।

सावन में क्या होता है?
इस पावन मास में श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। श्रावण मास में ज्यादातर श्रद्धालु सोमवार के दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की शुद्ध मन से पूजा करते हैं। अविवाहित लड़कियां श्रावण के हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखती हैं। कुछ महिलाएं मनचाहा पति पाने के लिए सोमवार व्रत करती हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। श्रावण के दौरान कांवड़ यात्रा भी बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र गंगा के पास विभिन्न धार्मिक स्थानों पर जाते हैं और वहां से गंगाजल लाकर शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को चढ़ाते हैं।

कुंडली में चंद्रमा की स्थिति होती है मजबूत :
सावन में सोमवार का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। सोमवार के अलावा सावन महीने में प्रत्येक दिन अत्यंत फलदायी होता है। सावन महीने की शिवरात्रि बहुत खास होती है। इस वर्ष सावन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 2 अगस्त शुक्रवार को शिवरात्रि मनायी जाएगी। 2 अगस्त को दोपहर 3:26 बजे से होगा और 3 अगस्त को दोपहर 3:50 बजे समाप्त होगा। शिवरात्रि की पूजा रात में की जाती है इसलिए सावन की शिवरात्रि 2 अगस्त को ही मनाई जाएगी। सावन में पहली सोमवारी 22 जुलाई और पहला मंगला गौरी व्रत 23 जुलाई को पड़ रहा है। वहीं दूसरी सोमवारी 29 जुलाई और मंगला गौरी व्रत 30 जुलाई को होगा। तीसरा सोमवारी व्रत 5 अगस्त और मंगला गौरी व्रत छह अगस्त को पड़ रहा है। चौथी सोमवारी 12 अगस्त और सावन महीने की चौथी व अंतिम मंगला गौरी व्रत श्रद्धालु 13 अगस्त को रखेंगे। वहीं सावन की पांचवीं व अंतिम सोमवारी 19 अगस्त को पड़ेगा।

सावन सोमवार का महत्व
सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। सोमवार का व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। साथ ही और शिव-गौरी जैसा दांपत्य जीवन का सुख मिलता है। वहीं सावन में भगवान शिव और मां गौरी की आराधना करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

सावन सोमवार व्रत लिस्ट
पहला सावन सोमवार व्रत- 22 जुलाई 2024
दूसरा सावन सोमवार व्रत- 29 जुलाई 2024
तीसरा सावन सोमवार व्रत- 5 अगस्त 2024
चौथा सावन सोमवार व्रत- 12 अगस्त 2024
पांचवां सावन सोमवार व्रत- 19 अगस्त 2024

मंगली गौरी व्रत कब-कब?
हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के हर मंगलवार के दिन मां पार्वती को समर्पित मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। इस साल सावन में 4 मंगला गौरी व्रत पड़ने वाले हैं।
पहला मंगला गौरी व्रत- 23 जुलाई को
दूसरा मंगला गौरी व्रत- 30 जुलाई
तीसरा मंगला गौरी व्रत- 6 अगस्त
चौथा मंगला गौरी व्रत- 13 अगस्त

सावन की शिवरात्रि 2 अगस्त को
सावन के महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024 को है। सावन शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विशेष पूजा आराधना की जाती है।

शिवलिंग की पूजा विधि
सावन ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी शिवलिंग की सही विधि से पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग की पूजा करने से पहले व्यक्ति को हमेशा मन और तन से पवित्र होना चाहिए। भगवान शिव को गंगा जल बहुत ज्यादा प्रिय है, ऐसे में शिवलिंग पर इसे चढ़ाने से शिव जी का आशीर्वाद मिलता है। इस दौरान गंगाजल को तांबे के लोटे भरकर ही जलहरी पर जल चढ़ाना चाहिए। सबसे पहले आप जल को जलहरी की दाईं ओर चढ़ाएं, इसे भगवान गणेश का स्थान माना जाता है। इसके बाद बाईं ओर जल चढ़ाएं, यहां कार्तिकेय का वास माना जाता है। इसके बाद आप आप शिवलिंग के बीच में जल चढ़ा सकते हैं। इस दौरान खड़े होकर जल नहीं चढ़ाना चाहिए, हमेशा बैठकर जल चढ़ाएं। फिर शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और बाद में बेलपत्र, फूल माला आदि अर्पित करें। पूजा के समय ध्यान रखें कि शिवलिंग की जलहरी के पास किसी भी तरह की पूजन सामग्री न हो। वहीं ऐसा कहा जाता है कि शिवलिंग की हमेशा आधी परिक्रमा करनी चाहिए।

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