लखनऊ। ‘लहरों से लड़कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’ कवि सोहन लाल द्विवेदी ने ये लाइनें यूं ही नहीं लिखी। इसकी जीती जागती मिसालें हमारे आसपास मौजूद हैं और उन्हीं में से एक हैं, ऐक्टर सुविंदर विक्की। साल 2004 में ऐक्टिंग में कदम रखने वाले सुविंदर विक्की ने 20 साल लंबा संघर्ष किया। घर पर खाली बैठे, हताशा का लंबा दौर झेला पर अपने भीतर के ऐक्टर को नहीं मरने दिया और आखिरकार 2023 में वेब सीरीज कोहरा से उनकी किस्मत का सितारा चमका और वे सबके चहेते बन गए।
मन में बुरे ख्याल आने लगे थे
अभी धुरंधर 2, सतलुज और इन दिनों बॉक्स आॅफिस पर धमाल मचा रही फिल्म आवारापन 2 जैसी चर्चित फिल्मों से लगातार सुर्खियां बटोर रहे सुविंदर विक्की संघर्ष के उस दौर को बहुत ही दुखद करार देते हैं। बकौल सुविंदर विक्की, ‘वह बहुत बुरा वक्त था। कई बार रोने वाले हालात हो जाते थे। मां-बाप की आंखों में सवाल होता था कि बेटा कुछ करेगा या ऐसे ही हमारी छाती पर मूंग दलेगा। पुरुष होने के नाते आपका फर्ज है कि आपने परिवार को देखें। बच्चों का पालन पोषण करें। बेशक अभी औरतें भी वर्किंग हैं। मेरी वाइफ भी काम करती है, मगर मर्द घर पर तो बैठा नहीं रहेगा। इसलिए, बड़ी हताशा और शर्म महसूस होती थी कि मेरी पत्नी काम कर रही हैं और मैं घर पर बैठा प्रॉजेक्ट का इंतजार कर रहा हूं। कई बार अजीब-अजीब ख्याल आते थे। बहुत दुखद समय था, पर कहीं न कहीं मेरी सचाई भगवान को दिखी तो उसने कहा कि चल बेटा, तेरा वक्त आ गया। तूने काफी सह लिया।’
बिना स्क्रिप्ट देखे की थी ‘धुरंधर 2’
आदित्य धर की ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर 2 में सुविंदर विक्की ने ब्रिगेडियर जहांगीर की छोटी भूमिका में भी अपनी छाप छोड़ी। मगर कोहरा में मेन लीड के बाद उन्होंने इतने छोटे रोल के लिए हां क्यों कहा? यह पूछने पर उन्होंने बताया, ‘धुरंधर 2 मैंने बिना स्क्रिप्ट देखे की थी। एक दिन मुझे मुकेश छाबड़ा का कॉल आया कि भाई एक बड़ा काम है, मगर और कुछ मत पूछना। कल या परसो, कब शूट कर सकते हो? नाइट चाहिए। मुकेश छाबड़ा से मेरे अच्छे संबंध हैं, पर मैंने कहा- पाजी, एक रात में आप क्या बड़ा काम करवा लोगे? 12-15 दिन हो तो समझ भी आए। वे बोले, विश्वास है? आप मेरे भरोसे पर करो तो मेरे पास उसके बाद कोई आॅप्शन ही नहीं था। मुझे स्क्रिप्ट तब मिली, जब मैं वैनिटी पर पहुंचा तो मुझे कुछ नहीं पता था कि वह किरदार इतना उभरकर आएगा।’
दिन में कोहरा, रात में सतलुज शूट की
सुविंदर विक्की की फिल्म सतलुज भी ओटीटी पर आने के दो दिनों में हटाए जाने को लेकर विवादों में रही लेकिन उन्हें अपने किरदार एसएसपी सुरजीत सिंह सुग्गा के लिए बहुत वाहवाही मिली। फिल्म को हटाए जाने पर निराशा जाहिर करते हुए वह कहते हैं, ‘यह बहुत ही निराशाजनक था, क्योंकि डायरेक्टर हनी त्रेहान और मेकर्स ने उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए इतनी लड़ाई लड़ी। फिर, हर किसी को हक होना चाहिए कि जो चीज आवाम के लिए बनी है, वो उन तक पहुंचे। आपने इतना स्वादिष्ट खाना बनाया है, अच्छे से परोसा लेकिन उसको खाने वाले भी तो हों, तो बुरा तो लगता ही है।’ उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी साझा किया। वह बताते हैं, ‘मैंने कोहरा के दौरान ही सतलुज भी शूट की थी। बीच में मेरी डेट भी क्लैश हुई था।’
इमरान की विनम्रता सीखने लायक
अपनी हालिया फिल्म आवारापन 2 के अनुभव पर सुविंदर बताते हैं, ‘आवारापन कल्ट फिल्म है। मुझे लगता है कि अगर मुझे आवारापन 2 के साथ जुड़ने का मौका मिला है तो शायद मैंने जिंदगी में अपनी कला या अपने क्राफ्ट के स्तर पर कुछ हासिल किया है। फिल्म में मेरा किरदार तो बहुत बढ़िया है ही, शबाना आजमी जी और इमरान हाशमी के साथ काम करना जबरदस्त अनुभव रहा। वो कहते हैं न कि पेड़ पर फल जितना ज्यादा होता है, वो उतना झुकता है, यही चीज इन लोगों के अन्दर है, जो सीखने लायक है।’




