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अटार्नी जनरल की अवमानना याचिका: भूषण ने न्यायालय में अपनी गलती स्वीकार की

नई दिल्ली। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में स्वीकार किया कि उन्होंने एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति के बारे में उच्चाधिकार चयन समिति की बैठक की कार्यवाही के विवरण को गढ़ा हुआ बताने संबंधी अपना ट्वीट करके सही में गलती की थी। भूषण ने अपने ट्वीट में कहा था कि सरकार ने शायद गढ़ा हुआ कार्यवाही विवरण न्यायालय में पेश किया है।

प्रशांत भूषण ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल

प्रशांत भूषण ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल द्वारा उनके खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा को अलग करने के अनुरोध के लिए शीर्ष अदालत में बिना शर्त माफी मांगने से इंकार कर दिया। अटार्नी जनरल ने प्रशांत भूषण के एक फरवरी के ट्वीट के कारण उनके खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इन ट्वीट में भूषण ने कहा था कि ऐसा लगता है कि केन्द्र ने शीर्ष अदालत को गुमराह किया है और शायद उसने सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति के मामले में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति की बैठक की कार्यवाही का गढ़ा हुआ विवरण पेश किया है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने शुरू में कहा कि वह अवमानना याचिका की सुनवाई से खुद को अलग नहीं करेंगे और फिर उन्होंने इस संबंध में भूषण के आवेदन पर विस्तार से सुनवाई की।

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भूषण के बयान को देखते हुए वह उनके खिलाफ दायर अपनी अवमानना याचिका वापस लेना चाहेंगे। उन्होंने कहा, वह (भूषण) इस न्यायालय के समक्ष यह बयान देने के लिए तैयार हैं कि उन्होंने गलती की। उन्होंने जो मुझे लिखित में दिया है उसके मद्देनजर मैं अपनी याचिका वापस ले लूंगा। उन्होंने (भूषण) कहा है कि उन्होंने सही में गलती की है। इसपर पीठ ने कहा, आप (वेणुगोपाल) उनके (भूषण) खिलाफ याचिका वापस ले सकते हैं या नहीं सकते हैं, लेकिन आपने एक सवाल उठाया है और हम इसका फैसला करेंगे। जब वेणुगोपाल ने कहा कि वह भूषण के खिलाफ याचिका पर जोर नहीं देंगे तो पीठ ने कहा, यह फैसला हमें करना है, न कि आपको। हमें सबकुछ पर फैसला करेंगे।

हम इन सभी पहलुओं पर विचार करेंगे

हम इन सभी पहलुओं पर विचार करेंगे। हम समझते हैं श्रीमान एजी (अटॉर्नी जनरल) कि आप बेहद निष्पक्ष हैं। हम सभी चीजों पर विचार करेंगे। भूषण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने पीठ से कहा कि भूषण कह रहे हैं कि उन्होंने गलती की है और अटार्नी जनरल भी कह रहे हैं कि वह अवमानना याचिका पर जोर नहीं देंगे। दवे ने पीठ से कहा कि अगर न्यायालय अटार्नी जनरल का यह बयान रिकार्ड करता है कि वह अपनी अवमानना याचिका के लिए दबाव नहीं देना चाहते हैं तो वह (भूषण) अपने दोनों आवेदन वापस ले लेंगे। ये दोनों आवेदन न्यायमूर्ति मिश्रा के सुनवाई से अलग हो जाने की मांग करते हुए दायर किए गए थे। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, सब कुछ खुले न्यायालय में हुआ है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हम अपनी जिम्मेदारी जानते हैं। दवे, अपने न्यायाधीशों पर भरोसा रखें।

आदेश लिखाने के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने दावे से पूछा

आदेश लिखाने के दौरान न्यायमूर्ति मिश्रा ने दावे से पूछा, सुनवाई से अलग होने संबंधी आवेदन के बारे में आपका क्या कहना है? दवे ने कहा कि वह इसे वापस ले लेंगे लेकिन न्यायमूर्ति मिश्रा ने टिप्पणी की कि ऐसा बिना शर्त माफी के साथ होना चाहिए। दवे ने कहा, मैं भूषण की ओर से बिना शर्त माफी मांग लूंगा। हालांकि, पीठ ने कहा कि उसका मानना है कि न्यायालय में मौजूद भूषण को स्वयं आगे आकर बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। इस पर भूषण खड़े हुए और उन्होंने कहा कि उन्होंने सुनवाई से अलग होने के लिए सही तरीके से आवेदन दायर किया है और वह बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार नहीं है। भूषण के इस बयान का संज्ञान लेते हुए पीठ ने अपने आदेश में कहा, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई से अलग होने की कोई वजह नहीं है।

इस व्यापक मुद्दे पर विचार किया जाएगा

हम इस पर विचार करेंगे। पीठ ने हालांकि, कहा कि इस व्यापक मुद्दे पर विचार किया जाएगा कि क्या कोई व्यक्ति अदालत के विचाराधीन किसी मामले में जनता की राय को प्रभावित करने के लिए न्यायालय की आलोचना कर सकता है। पीठ इस मामले में अब तीन अप्रैल को आगे सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि वह इस तथ्य पर विचार करेगी कि क्या कोई व्यक्ति अदालत के विचाराधीन मामले में जनता की राय को प्रभावित करने के लिए न्यायालय की आलोचना कर सकता है जो न्याय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप हो सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा था कि आज कल अदालतों में विचाराधीन मामलों में पेश होने वाले वकीलों के लिए मीडिया में बयान देना और टीवी पर चर्चा में हिस्सा लेना एक ट्रेन्ड बन गया है। न्यायालय ने कहा कि वह मीडिया द्वारा मामलों की रिपोर्टिंग के खिलाफ नहीं है परंतु न्यायाधीन मामलों में पेश होने वाले वकीलों को सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए।

भूषण ने अपने ट्वीट में कहा…

भूषण ने अपने ट्वीट में कहा था कि ऐसा लगता है कि सरकार ने शीर्ष अदालत को गुमराह किया और शायद उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की बैठक की कार्यवाही का गढ़ा हुआ विवरण पेश है। न्यायालय ने अवमानना याचिका पर भूषण को नोटिस जारी कर उनसे तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। केन्द्र सरकार ने भी प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके एक फरवरी के ट्वीट को लेकर अलग से अवमानना याचिका दायर कर रखी है। भूषण के समर्थन में अरुणा राय, अरूधंति राय और शैलेश गांधी सहित दस सामाजिक कार्यकर्ता भी शीर्ष अदालत पहुंच गए थे। इनके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण शौरी सहित पांच वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप के लिए अलग से आवेदन दायर किया था।

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