आखिरकार चार दिन की वोट-गिनती के बाद जिसमें ‘कभी हां तो कभी न’ का तनावपूर्ण उतार-चढ़ाव आता रहा, जोसफ रोबिनेट बिडेन जूनियर (जन्म 20 नवम्बर, 1942) अमेरिका के 46 वें राष्ट्रपति चुन लिए गये। वह अमरीकी राष्ट्रपति के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक मत प्राप्त करके वाले राष्ट्रपति बन गए हैं। उन्होंने पॉपुलर व इलेक्ट्रोल,दोनों ही वोट में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को पराजित करते हुए उन्हें दूसरे टर्म से वंचित कर दिया।
हालांकि ट्रम्प ने इन पंक्तियों के लिखे जाने तक अभी हार स्वीकार नहीं की है, लेकिन अमरीका जिस तरह जश्न के मूड में है, लगता नहीं कि ट्रम्प के हो हल्ला का कोई मतलब होगा। बिना किसी आधार व सबूत के चुनावी धांधली का निरंतर दावा करते हुए ट्रम्प ने बिडेन पर ‘जीत चुराने’ व ‘जल्दबाजी में गलत तरह से विजेता बनने’ का आरोप लगाते हुए कहा है ‘अभी चुनाव पूर्ण नहीं हुआ है, यानी वह पेन्सिल्वेनिया आदि स्विंग राज्यों (जिनमें जीत-हार का मत-अंतर काफी कम रहा) में वोटों की पुन: गिनती कराने का प्रयास करेंगे और व्हाइट हाउस में बने रहने के लिए अदालत का सहारा भी लेंगे, जिसके लिए वह अपने समर्थकों से 60 मिलियन डॉलर एकत्र कर रहे हैं, लेकिन प्रबल संभावना यही है कि 20 जनवरी 2021 को जो बिडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बन जायेंगे, साथ ही भारतीय मूल की माँ और जमैकन मूल के बाप की बेटी कमला हैरिस उपराष्ट्रपति होंगी।
भारत में कमला के ननिहाल थुलासेंदरापुरम, तमिलनाडु में पूजा की गई। अमेरिका के इतिहास में यह महत्वपूर्ण पद संभालने वाली कमला पहली महिला हैं,वह भी अश्वेत। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि इस बार अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल के मतदाताओं का पहले से कहीं अधिक महत्व था। इसी को मद्देनजर रखते हुए बिडेन ने कमला को अपने रनिंग मेट के रूप में चुना। इस महत्व को ट्रम्प भी समझते थे, इसलिए पिछले वर्ष ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ रैली में उन्होंने हजारों भारतवासियों के समक्ष भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा किया, और फिर इस साल फरवरी में कोविड महामारी की परवाह किये बगैर भारत आये व अहमदाबाद (गुजरात) में ‘नमस्ते ट्रम्प’ कार्यक्रम में शामिल हुए।
विश्लेषकों ने दोनों ‘हाउडी मोदी’ व ‘नमस्ते ट्रम्प’ की व्याख्या यह की थी कि मोदी दूसरे देश के अपने समकालीन दक्षिणपंथी नेता ट्रम्प के चुनाव अभियान में उनकी मदद कर रहे थे। इसके बावजूद अमेरिका में मतदान के बाद यह बात सामने आयी कि जिन राज्यों में ट्रम्प को ‘हाउडी मोदी’ व ‘नमस्ते ट्रम्प’ से बढ़त की उम्मीद थी, उनमें भारतीय मूल के चार में से तीन यानी 75 प्रतिशत मतदाताओं ने बिडेन का समर्थन किया। अमेरिका में लगभग 2 मिलियन भारतीय मूल के मतदाता हैं, जिनका महत्व स्विंग राज्यों में अधिक हो जाता है, क्योंकि वहां जीत व हार का अंतर बहुत मामूली होता है। इसका अर्थ यह है कि बिडेन व कमला की जीत में भारतीय मूल के वोटर्स की अहम भूमिका रही।





