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CBI ने कोर्ट को बताया: मुलायम और अखिलेश के खिलाफ प्रारंभिक जांच 2013 में बद हो गई थी

नई दिल्ली। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने उच्चतम न्यायालय को शुक्रवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्रारंभिक जांच 2013 में बंद कर दी गई थी।

रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जांच ब्यूरो के इस कथन का संज्ञान लेते हुए उसे कांग्रेस कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी की अर्जी पर इस मामले में चार सप्ताह के भीतर नया जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ 2005 में याचिका दायर की गई थी और सीबीआई तथा आय कर अधिकारियों को उनके खिलाफ कुछ भी अनुचित नहीं मिला।

सपा सुप्रीमो ने शीर्ष अदालत में दाखिल

सपा सुप्रीमो ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी लोकसभा चुनाव के दौरान उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक पुराने मामले को उठाकर उनकी छवि खराब करना चाहते हैं। शीर्ष अदालत ने 25 मार्च को मुलायम सिंह यादव को नोटिस जारी किया था। इसी के जवाब में सपा नेता ने यह हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी ने 2019 के चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दुर्भावनापूर्ण मंशा से ही यह आवेदन दायर किया है।

न्यायालय ने इस फैसले पर पुनर्विचार

चतुर्वेदी ने इस आवेदन में जांच ब्यूरो को सपा नेता मुलायम सिंह और उनके दोनों बेटों अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ आरोपों की जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। शीर्ष अदालत ने चतुर्वेदी की याचिका पर एक मार्च 2007 को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को मुलायम सिंह यादव और उनके परिजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने इस फैसले पर पुनर्विचार के लिए मुलायम सिंह और उनके बेटों की पुनर्विचार याचिका 2012 में खारिज कर दी थी और जांच ब्यूरो को उनके खिलाफ अपनी जांच जारी रखने का आदेश दिया था। न्यायालय ने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल को इस जांच के दायरे से बाहर कर दिया था।

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