लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में अकादमी द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण एवं अभिलेखीकरण की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्वालियर एवं जयपुर घराने की बंदिशें – ख़्याल गायन के संदर्भ में विषय पर अकादमी अभिलेखागार हेतु विशेष साक्षात्कार एवं स्टूडियो रिकॉर्डिंग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुविख्यात शास्त्रीय गायिका अंजली मालकर पुणे, विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहीं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत एवं निदेशक राज कुमार ने अंजली मालकर को अंग वस्त्र भेंट कर अभिनंदन भी किया गया।
अंजली मालकर ने शास्त्रीय गायन की बारीकियां कुमुदिनी कतदरे, पंडित विकास कशालकर एवं विदुषी वीणा सहस्रबुद्धे से अर्जित की हैं। उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के 13वीं शताब्दी से लेकर भारत की स्वतंत्रता तक के 700 वर्षों के इतिहास पर दो विस्तृत अत्यंत महत्वपूर्ण खंड लिखे हैं। इस ऐतिहासिक शोध कार्य को महाराष्ट्र साहित्य संस्कृति मंडल द्वारा प्रकाशित किया गया है। अंजली मालकर ने ग्वालियर एवं जयपुर घराने की गायकी की विशिष्टताओं, बंदिशों की संरचना एवं स्वरूप, राग-विस्तार, लयकारी तथा ख़्याल गायन में बंदिशों की महत्ता पर विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की। उन्होंने राग मालकौंस में एक सुमधुर रचना ही नहीं सुनायी बल्कि उसकी सूक्ष्म व्याख्या भी की। राग मालकौंस या मालकौश भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक बेहद लोकप्रिय, प्राचीन और गंभीर प्रकृति का राग है। यह भैरवी थाट से उत्पन्न माना जाता है और यह एक वीर एवं भक्ति रस प्रधान पुरुष राग है। संवाद के दौरान दोनों घरानों की विशिष्ट गायन शैलियों, पारंपरिक बंदिशों तथा गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से इनके संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। साक्षात्कार का संचालन भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के संगीत संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सृष्टि माथुर द्वारा किया गया। अकादमी अभिलेखागार के लिए की गई यह रिकॉर्डिंग भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत के दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से इन दोनों प्रतिष्ठित घरानों की संगीत परंपरा, बंदिशों एवं गायकी की विशिष्टताओं को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।




